युवक की मौत के बाद निजी अस्पताल में हंगामा, डेथ समरी नहीं देने का आरोप; परिजनों ने किया प्रदर्शन

कामठी: कन्हान-कांद्री निवासी 20 वर्षीय शशांक सचिन वानखेड़े की उपचार के दौरान मौत के बाद निजी अस्पताल में परिजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने मृतक के उपचार का विवरण देने वाली ‘डेथ समरी’ (मृत्यु का चिकित्सकीय रिपोर्ट) समय पर उपलब्ध नहीं कराई। इसके विरोध में सोमवार रात करीब साढ़े सात बजे परिजनों ने कलमना रोड स्थित लाइफ लाइन अस्पताल के सामने धरना दिया। प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल रहा।

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बुखार के बाद अस्पताल में कराया गया था भर्ती

मिली जानकारी के अनुसार, बीटेक की पढ़ाई कर रहे शशांक वानखेड़े को बुखार आने के बाद पहले कन्हान के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां के डॉक्टरों की सलाह पर आगे के उपचार के लिए उन्हें कामठी स्थित लाइफ लाइन अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। उपचार के दौरान शशांक की मौत हो गई।

डेथ समरी नहीं मिलने से परिजन नाराज

शशांक की मौत के बाद परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया। इसके बाद उन्होंने अस्पताल से उपचार का पूरा विवरण देने वाली डेथ समरी मांगी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने यह रिपोर्ट समय पर उपलब्ध नहीं कराई। इससे नाराज परिजनों ने सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ अस्पताल के सामने धरना शुरू कर दिया।

अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी

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प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। करीब एक घंटे तक चले इस प्रदर्शन के कारण अस्पताल परिसर में तनाव की स्थिति बनी रही। आंदोलनकारियों ने आशंका जताई कि उन्हें अस्पताल के अंदर बुलाकर उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए जा सकते हैं।

पुलिस और मेडिकल टीम ने समझाने का प्रयास किया

मामले की जानकारी मिलने के बाद वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक महेश आंधळे और मेडिकल टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने आंदोलनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन खबर लिखे जाने तक मामले का कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया था।

पांच सदस्यीय समिति का प्रस्ताव भी ठुकराया

अस्पताल की महिला डॉक्टरों की ओर से मामले के समाधान के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने का प्रस्ताव रखा गया। इसमें आंदोलनकारियों और मृतक के परिजनों में से दो लोगों को शामिल करने की बात कही गई, ताकि डेथ समरी को लेकर निर्णय लिया जा सके। हालांकि, आंदोलनकारियों ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया।

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