नागपुर: अभियांत्रिकी पाठ्यक्रम में प्रवेश दिलाने के लिए बारहवीं की फर्जी ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) तैयार कर उसे सीईटी समुपदेशन पोर्टल पर अपलोड करने का मामला सामने आया है। इस मामले में एमआईडीसी और नंदनवन पुलिस थाने में दो अलग-अलग अपराध दर्ज किए गए हैं। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विद्यार्थियों को बीटेक पाठ्यक्रम में प्रवेश दिलाए जाने का आरोप है। दोनों मामलों में संबंधित विद्यार्थियों के प्रवेश रद्द कर दिए गए हैं।
पहले मामले में 2.50 लाख रुपये लेने का आरोप
एमआईडीसी पुलिस थाने में एक 52 वर्षीय अभिभावक की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने उनके बेटे को शैक्षणिक सत्र 2025-26 में हिंगणा रोड स्थित रायसोनी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, हिंगणा में बीटेक (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) में प्रवेश दिलाने का आश्वासन दिया था। इसके लिए विद्यार्थी के मूल दस्तावेज लिए गए और परिवार की जानकारी के बिना बारहवीं की फर्जी टीसी तैयार कर सीईटी समुपदेशन पोर्टल पर अपलोड की गई।
फर्जी टीसी का खुलासा, विद्यार्थी का प्रवेश रद्द
शिकायत में आरोप है कि प्रवेश के लिए परिवार से 2 लाख 50 हजार रुपये लिए गए। दस्तावेजों की दोबारा जांच के दौरान तकनीकी शिक्षा संचालनालय (डीटीई) के अधिकारियों के संज्ञान में फर्जी टीसी का मामला आया। इसके बाद संबंधित विद्यार्थी का प्रवेश रद्द कर दिया गया। इस मामले में शुभम निंबाळकर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ एमआईडीसी पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
दूसरे विद्यार्थी के प्रवेश में भी फर्जी दस्तावेज
नंदनवन पुलिस थाने में दर्ज दूसरे मामले में 18 वर्षीय छात्रा को फर्जी बारहवीं की टीसी के आधार पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश दिलाने का आरोप है। अभिभावक की शिकायत के अनुसार, प्रवेश के लिए आरोपियों ने परिवार से 1 लाख 30 हजार रुपये लिए थे।
कई आरोपियों के नाम सामने आए
इस मामले में नंदनवन पुलिस ने पंकज मधुकर चिमणतवार, रामदास डहारेवाल, वृषाल धोटे और शीतल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है।
अन्य कॉलेजों में भी फर्जीवाड़े की जांच
डीटीई की जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या इसी तरह अन्य अभियांत्रिकी महाविद्यालयों में प्रवेश दिलाने के लिए भी फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया है। पुलिस और संबंधित विभाग द्वारा सलाहकारों, एजेंटों तथा कॉलेज कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है।

