बिना वैध खाद्य व्यवसाय लाइसेंस चल रही थी कैंटीन
नागपुर के इंदिरा गांधी शासकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (मेयो) परिसर में डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और अस्पताल कर्मचारियों को भोजन उपलब्ध कराने वाली श्री बालाजी कैंटीन यानी ‘डॉक्टर्स कैंटीन’ पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने कार्रवाई की। जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में ग्राहकों को भोजन परोसने वाली कैंटीन के पास वैध खाद्य व्यवसाय लाइसेंस ही नहीं था।
रसोई और भोजन परोसने की जगह में मिली गंदगी
FDA की जांच के दौरान कैंटीन के रसोईघर और भोजन परोसने वाले क्षेत्र में गंभीर अस्वच्छता पाई गई। कचरा प्रबंधन के लिए भी उचित व्यवस्था नहीं थी। खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने कैंटीन का कारोबार तत्काल बंद कर दिया।
खाने और पीने के पानी की जांच रिपोर्ट भी नहीं मिली
जांच में कैंटीन में तैयार किए जाने वाले खाद्य पदार्थों के साथ-साथ पीने के पानी की गुणवत्ता की आवश्यक जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं थी। इसके अलावा भोजन तैयार करने और परोसने वाले कर्मचारियों की आवश्यक चिकित्सकीय जांच से संबंधित रिकॉर्ड भी नहीं मिले।
अस्पताल परिसर में ही खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी
मेयो जैसे बड़े सरकारी अस्पताल के परिसर में ही खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी सामने आने से रोगियों, मेडिकल छात्रों और अस्पताल कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। कार्रवाई ने अस्पताल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है
FDA की टीम ने की कार्रवाई
नागपुर विभाग के संयुक्त आयुक्त कृष्णा जयपूरकर के नेतृत्व में सहायक आयुक्त आर. आर. शाह और खाद्य सुरक्षा अधिकारी शीतल देशपांडे ने यह कार्रवाई की। कैंटीन का संचालन पीयूष रविंद्र लारोकर के स्वामित्व से संबंधित बताया गया है। महाविद्यालय प्रशासन ने कैंटीन के लिए परिसर की जगह किराए पर दी थी।
लाइसेंस और कमियां दूर करना जरूरी
संयुक्त आयुक्त कृष्णा जयपूरकर ने स्पष्ट किया कि कैंटीन संचालक के लिए वैध खाद्य व्यवसाय लाइसेंस प्राप्त करना और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी सभी कमियों को दूर करना अनिवार्य है। FDA की इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी या निजी, किसी भी परिसर में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

