नागपुर: बदलती अर्थव्यवस्था के साथ नागपुर जिले में नागरिकों की कर्ज लेने की मानसिकता में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब लोग कर्ज को बोझ नहीं, बल्कि आर्थिक प्रगति का माध्यम मान रहे हैं। बैंकिंग क्षेत्र की सलाह—समय पर कर्ज चुकाकर सिबिल स्कोर मजबूत करना—को नागपुरकरों ने सकारात्मक रूप से अपनाया है।
कर्ज लेना हुआ आसान, सोच में आया बड़ा बदलाव
नागपुर में अब कर्ज लेना और उसे समय पर चुकाना एक सामान्य वित्तीय व्यवहार बन चुका है। पहले जहां कर्ज को परेशानी माना जाता था, वहीं अब लोग व्यवसाय, घर और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए योजनाबद्ध तरीके से कर्ज ले रहे हैं।
ऑटो-डेबिट सुविधा के कारण समय पर ईएमआई भुगतान बढ़ा है, जिससे बैंकों की वसूली प्रक्रिया में भी सुधार हुआ है।
15 से 18 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचा कर्ज वितरण
ताजा वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, नागपुर जिले में सभी बैंकों द्वारा कुल मिलाकर 15 से 18 हजार करोड़ रुपये तक का कर्ज वितरण किया गया है।
मार्च तक के आंकड़ों में 3,266 करोड़ रुपये का डायरेक्ट लोन वितरण दर्ज किया गया है।
इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा लिया जा रहा कर्ज
नागपुर में लोग मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए कर्ज ले रहे हैं:
- कृषि और उससे जुड़े व्यवसाय
- उद्योग और व्यापार विस्तार
- घर खरीद और गृह सजावट
- वाहन खरीद
- शिक्षा और व्यक्तिगत जरूरतें
औद्योगिक क्षेत्रों जैसे नागपुर, बुटीबोरी और हिंगणा में बढ़ती मांग के चलते 7,500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। वहीं, रिटेल सेक्टर (गृह, वाहन और व्यक्तिगत लोन) में 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज वितरण हुआ है।
गृह ऋण की सबसे अधिक मांग
कर्ज वितरण के आंकड़ों में गृह ऋण (होम लोन) का दबदबा सबसे अधिक देखा गया है।
रिटेल और गैर-प्राथमिकता क्षेत्र के कुल कर्ज में 60% से अधिक हिस्सा अकेले गृह ऋण का है।
कम ब्याज दर और निजी बैंकों द्वारा प्रोजेक्ट डेवलपर्स के साथ सीधे करार होने के कारण लोगों का रुझान गृह ऋण की ओर तेजी से बढ़ा है।
जिले में 10 लाख से अधिक कर्जधारक
नागपुर जिले में विभिन्न बैंकिंग संस्थाओं के माध्यम से लगभग 6.5 से 7.5 लाख सक्रिय कर्जधारक हैं।
इसके अलावा:
- 1.5 लाख छोटे-बड़े व्यापारी और उद्यमी
- 2.5 से 3 लाख नौकरीपेशा वर्ग
इस प्रकार जिले में कुल 10 लाख से अधिक लोग किसी न किसी रूप में कर्ज प्रणाली से जुड़े हुए हैं।
ठेवी (डिपॉजिट) में भी नागपुर आगे
नागपुर केवल कर्ज लेने में ही नहीं, बल्कि बैंकों में बचत जमा करने में भी अग्रणी है।
आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में एक वर्ष के दौरान 35 से 40 हजार करोड़ रुपये तक की बैंक जमा (डिपॉजिट) दर्ज की गई है।
40 से अधिक बैंकों का नेटवर्क, 800+ शाखाएं
नागपुर जिले में 40 से अधिक बैंकिंग संस्थाएं कार्यरत हैं, जिनकी 800 से ज्यादा शाखाओं के माध्यम से नागरिकों को वित्तीय सेवाएं और कर्ज उपलब्ध कराया जा रहा है।
यह पूरा परिदृश्य दर्शाता है कि नागपुर तेजी से वित्तीय जागरूकता और आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

