गोंदिया: नीट-यूजी 2024 के पेपर लीक विवाद के बाद आयोजित की गई पुनर्परीक्षा ने छात्रों के संयम, तैयारी और मानसिक मजबूती की कड़ी परीक्षा ली। भीषण गर्मी, मानसिक दबाव और अपेक्षाकृत कठिन प्रश्नपत्रिका जैसे तीन बड़े चुनौतियों के बीच 2,266 पंजीकृत छात्रों में से 2,147 छात्रों ने परीक्षा दी, जबकि 119 छात्र अनुपस्थित रहे। यह आंकड़ा दर्शाता है कि पेपर लीक का प्रभाव अब भी छात्रों पर बना हुआ है।
जिले के 8 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई, लेकिन छात्रों के चेहरों पर आत्मविश्वास से ज्यादा तनाव साफ नजर आया। परीक्षा के बाद सामने आई प्रतिक्रियाओं में फिजिक्स का पेपर सबसे कठिन, केमिस्ट्री संतुलित और बायोलॉजी अपेक्षाकृत आसान बताया गया।
10-12 घंटे की पढ़ाई घटकर 4-5 घंटे पर आई
पेपर लीक और पहली परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों का आत्मविश्वास कमजोर पड़ा। पहले जहां छात्र रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे, वहीं पुनर्परीक्षा के दौरान यह समय घटकर 4 से 5 घंटे रह गया। लगातार तैयारी बनाए रखना अधिकांश छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।
परीक्षा शुरू होते ही छात्रा की तबीयत बिगड़ी
भीषण गर्मी का असर परीक्षा के दौरान भी देखने को मिला। मिताली ढगे नामक छात्रा की परीक्षा शुरू होते ही तबीयत खराब हो गई। केंद्र पर मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत प्राथमिक उपचार देकर उसे दोबारा परीक्षा में बैठाया। हालांकि, परीक्षा समाप्त होने के बाद उसकी स्थिति फिर बिगड़ने पर उसे एंबुलेंस से सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।
डॉक्टर बनने के सपने के लिए 100 किलोमीटर तक का सफर
ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के छात्रों को परीक्षा देने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ी। अर्जुनी-मोरगांव के छात्र 80 किमी और चिचगढ़ क्षेत्र के छात्र 100 किमी से अधिक यात्रा कर परीक्षा केंद्र पहुंचे। तेज धूप, यातायात दबाव और समय की कमी के बावजूद छात्र अपने माता-पिता के साथ परीक्षा केंद्र तक पहुंचे, जहां कई अभिभावक पूरे दिन बाहर इंतजार करते रहे।
एक बेंच पर दो छात्र: व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
कुछ परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हुए। गर्ल्स कॉलेज केंद्र पर एक ही बेंच पर दो छात्रों को बैठाने की जानकारी सामने आई। पहले से गर्मी से परेशान छात्रों को सीमित जगह में बैठकर परीक्षा देनी पड़ी, जिससे उन्हें असुविधा हुई। अभिभावकों ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इतनी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षा के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कट-ऑफ कम रहने की संभावना
छात्रों के अनुसार, इस बार की पुनर्परीक्षा की प्रश्नपत्रिका पहली परीक्षा से अधिक कठिन थी। खासकर फिजिक्स के सवाल कॉन्सेप्ट आधारित और समय लेने वाले थे। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार मेरिट लिस्ट पर असर पड़ सकता है और कट-ऑफ अपेक्षाकृत कम रह सकता है।

