पति का साया छिना तो ‘साऊ’ बनी सहारा, 550 माताओं को दिया आत्मनिर्भर बनने का हौसला

नागपुर : पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी अचानक महिलाओं के कंधों पर आ जाती है। बच्चों की परवरिश, उनकी पढ़ाई और घर का खर्च कैसे चलेगा, इस चिंता से कई महिलाएं मानसिक तनाव का शिकार हो जाती हैं। ऐसी महिलाओं के लिए ‘साऊ’ एकल महिला समिति उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। समिति ने नागपुर की 550 एकल माताओं को सहायता देकर उन्हें आत्मविश्वास के साथ जीवन आगे बढ़ाने का हौसला दिया है।

  • Save

550 एकल माताओं तक पहुंची मदद

मानेवाड़ा क्षेत्र के अत्तदीप नगर में ‘साऊ’ एकल महिला समिति का कार्यालय है। समिति की जिला समन्वयक सुजाता भोंगाडे अपने सहयोगियों रोशनी गंभीर, अश्विनी भारद्वाज, प्रीति नाकतोड़ें, बनसोडे और आशा गुरनुले के साथ एकल महिलाओं के पुनर्वास के लिए लगातार काम कर रही हैं।

कोरोना काल में बढ़ी महिलाओं की मुश्किलें

कोरोना महामारी के दौरान उद्योग और व्यवसाय बंद हो गए थे। इसी दौरान कई परिवारों के कमाने वाले पुरुषों की मृत्यु हो गई। इससे अनेक परिवारों के सामने रोजगार और दो वक्त के भोजन का संकट खड़ा हो गया। बच्चों की परवरिश और शिक्षा की जिम्मेदारी अचानक महिलाओं पर आ गई।

  • Save

मनपा से मिली सूची, सामने आई 550 महिलाओं की स्थिति

ऐसी महिलाओं की मदद के लिए ‘साऊ’ समिति ने नागपुर महानगरपालिका से कोरोना संक्रमण के दौरान मृत लोगों की सूची मांगी। सूची की जांच के बाद समिति को ऐसे 550 परिवार मिले, जिनमें कमाने वाले पुरुष की मृत्यु के बाद महिलाएं अकेले परिवार संभाल रही थीं।

इन महिलाओं के पास कई मामलों में रोजगार का कोई साधन नहीं था। बच्चों का पालन-पोषण और उनकी शिक्षा कैसे जारी रखी जाए, यह उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी।

  • Save

रोजगार से लेकर मानसिक तनाव तक मदद

‘साऊ’ एकल महिला समिति ने इन महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि रोजगार, बच्चों की शिक्षा और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं में भी सहयोग देने का प्रयास किया। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ रहे कदम

समिति का उद्देश्य पति को खो चुकी महिलाओं को परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय आत्मविश्वास के साथ जीवन दोबारा शुरू करने का अवसर देना है। विभिन्न प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के माध्यम से एकल माताओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास लगातार जारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share via
Copy link