नागपुर: महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दो छात्रों की एक दर्दनाक सड़क हादसे में मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब दोनों छात्र रात में खाना खाने के बाद अपने वसतिगृह लौट रहे थे। कच्चे रास्ते के एक गहरे गड्ढे में गिरने से यह दुर्घटना हुई। सबसे दुखद बात यह रही कि दोनों छात्र पूरी रात घटनास्थल पर ही घायल अवस्था में पड़े रहे और समय पर मदद न मिलने के कारण उनकी जान चली गई।
मृत छात्रों की पहचान सक्षम विनोद बंसोड (20) और आर्यन रविंद्र सोनटक्के (20) के रूप में हुई है। दोनों तृतीय वर्ष के छात्र थे और विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रह रहे थे। इस घटना के बाद पूरे विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप मच गया है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
रातभर चला तलाश अभियान, नहीं मिला कोई सुराग
छात्रों के निर्धारित समय पर हॉस्टल न लौटने पर वॉर्डन को संदेह हुआ। दोस्तों से पूछताछ में पता चला कि वे बाहर गए थे। इसके बाद रातभर उनकी तलाश की गई, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला। मोबाइल पर संपर्क भी नहीं हो पा रहा था। यहां तक कि उनके माता-पिता को भी रात में ही सूचित किया गया।
घटनास्थल के पास ही पड़े रहे घायल, मदद नहीं मिली
तलाश के दौरान होटल, बेसा और मनीष नगर तक खोजबीन की गई, लेकिन असल में दोनों छात्र विश्वविद्यालय से कुछ ही दूरी पर घायल अवस्था में पड़े थे। दुर्भाग्यवश किसी को यह अंदाजा नहीं हुआ कि वे उस दिशा में जा सकते हैं, जिसके कारण उन्हें समय पर मदद नहीं मिल सकी।
मोबाइल की वजह से नहीं हो पाया संपर्क
सूत्रों के अनुसार, आर्यन अपना मोबाइल होटल में भूल गया था, जबकि सक्षम का मोबाइल डिस्चार्ज हो गया था। इसी कारण हादसे के बाद वे किसी से संपर्क नहीं कर सके। अगर उनके पास मोबाइल होता, तो संभवतः उनकी जान बचाई जा सकती थी।
प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस घटना के बाद पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पहला, कुछ दिन पहले हॉस्टल में रैगिंग का मामला सामने आया था, जिसे गोपनीय रखा गया।
दूसरा, इस हादसे में भी पुलिस द्वारा कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। बुटीबोरी थाना प्रभारी ने भी जानकारी देने से इनकार कर दिया।
परिवार और विश्वविद्यालय में शोक की लहर
बताया जा रहा है कि सक्षम के पिता न्यायाधीश हैं, जबकि आर्यन के पिता वकील हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद दोनों परिवारों और विश्वविद्यालय में गहरा शोक व्याप्त है।
यह हादसा न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि समय पर मदद मिलना कितना जरूरी होता है।

