नागपुर में करीब 347 करोड़ रुपये के चालान लंबित
नागपुर शहर में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन से जुड़े करीब 347 करोड़ रुपये के ई-चालान की वसूली लंबित है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट की ओर से बकाया ट्रैफिक जुर्माने को बिजली बिल से जोड़ने की संभावना तलाशने के सुझाव ने नागपुर ट्रैफिक पुलिस का ध्यान आकर्षित किया है।
ट्रैफिक पुलिस ने विचार का किया स्वागत
नागपुर ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों ने इस विचार का स्वागत करते हुए कहा कि बकाया चालान को किसी नियमित और जरूरी उपयोगिता बिल से जोड़ने पर वाहन मालिकों को लंबित जुर्माना जमा करने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकता है।
हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक ऐसा तंत्र ट्रैफिक विभाग अपने स्तर पर लागू नहीं कर सकता। इसके लिए महाराष्ट्र सरकार के स्तर पर निर्णय और स्पष्ट कार्यप्रणाली तैयार करना आवश्यक होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने बिजली बिल से जोड़ने का सुझाव दिया
सड़क सुरक्षा से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने बकाया ट्रैफिक चालान की राशि को बिजली बिल में जोड़ने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि यदि ई-चालान जारी होने के बाद जुर्माने की वसूली ही नहीं होती, तो केवल चालान जारी करने का उद्देश्य सीमित रह जाता है।
देशभर में करीब 20 हजार करोड़ रुपये बकाया
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे गए आंकड़ों के अनुसार, देशभर में करीब 45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान जारी किए गए थे। इनमें से लगभग 25,000 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है, जबकि करीब 20,000 करोड़ रुपये अभी भी बकाया हैं।
नागपुर में मौजूदा व्यवस्था से हो रही वसूली
नागपुर ट्रैफिक पुलिस मौजूदा व्यवस्थाओं के माध्यम से लंबित चालानों की वसूली का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि बिजली बिल जैसे नियमित भुगतान से जुड़ी व्यवस्था के साथ बकाया चालान जोड़ने से डिफॉल्टर वाहन मालिकों पर जुर्माना जमा करने का अतिरिक्त दबाव बन सकता है।
फिलहाल केवल सुझाव, अंतिम फैसला सरकार के हाथ में
बकाया ट्रैफिक चालान को बिजली बिल से जोड़ने का प्रस्ताव फिलहाल सुझाव के स्तर पर है। नागपुर में इसे लागू किया जाएगा या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय महाराष्ट्र सरकार को लेना होगा।

