नागपुर मेडिकल में 3 दिन से हजारों लीटर पानी बर्बाद, खुदाई के दौरान फूटी मुख्य पाइपलाइन; प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

नागपुर: शहर में संभावित जलसंकट की आशंका के बीच शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मेडिकल) परिसर में पानी की बर्बादी का मामला सामने आया है। अस्पताल के शवागार भवन के पास खुदाई के दौरान मुख्य जलवाहिनी क्षतिग्रस्त होने से पिछले तीन दिनों से हजारों लीटर स्वच्छ पानी बर्बाद होने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि पाइपलाइन टूटने के बाद संबंधित ठेकेदार ने इसकी सूचना महानगरपालिका प्रशासन को देकर तत्काल मरम्मत कराने की पहल नहीं की। इस मामले को लेकर नागरिकों में नाराजगी है।

  • Save

खुदाई के दौरान फूटी मुख्य जलवाहिनी

मेडिकल परिसर में सीमेंट सड़क निर्माण के लिए खुदाई का काम चल रहा है। इसी दौरान कथित लापरवाही के कारण मुख्य जलवाहिनी क्षतिग्रस्त हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन दिनों से जब भी नलों के माध्यम से पानी की आपूर्ति शुरू होती है, तब पाइपलाइन से पानी बहकर सड़क पर फैल जाता है। इससे बड़ी मात्रा में स्वच्छ पानी व्यर्थ जा रहा है।

संभावित जलकटौती के बीच पानी की बर्बादी

एक ओर नागपुर शहर में संभावित जलसंकट को देखते हुए महानगरपालिका प्रशासन 10 प्रतिशत पानी कटौती पर विचार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर मेडिकल परिसर में पाइपलाइन से पानी बहने का मामला सामने आया है। ऐसे समय में पानी की बर्बादी ने जल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप

रिपोर्ट के मुताबिक, जलवाहिनी टूटने के बाद ठेकेदार ने महानगरपालिका को सूचना देकर तत्काल मरम्मत कराने की पहल नहीं की। यह भी आरोप लगाया गया है कि मेडिकल प्रशासन की जानकारी में मामला होने के बावजूद ठेकेदार से जवाब नहीं मांगा गया। नागरिकों ने इस कथित लापरवाही की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

  • Save

सड़क निर्माण और पेड़ों की कटाई पर भी सवाल

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि शहर में संभावित जलसंकट की पृष्ठभूमि में सीमेंट सड़कों के नए कार्यों को रोकने की बात कही गई है, लेकिन मेडिकल परिसर में सड़क निर्माण का काम जारी है। इन कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई किए जाने का भी दावा किया गया है। इस मुद्दे पर भी नागरिकों ने सवाल उठाए हैं।

पाइपलाइन की तत्काल मरम्मत और कार्रवाई की मांग

नागरिकों की मांग है कि क्षतिग्रस्त जलवाहिनी की तत्काल मरम्मत कर पानी की बर्बादी रोकी जाए। साथ ही, मामले की जांच कर लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। संभावित जलसंकट को देखते हुए पानी की आपूर्ति व्यवस्था में ऐसी घटनाओं को रोकना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share via
Copy link