नागपुर: खापरखेड़ा थर्मल पावर स्टेशन के नांदगांव स्थित राख भंडारण तालाब (ऐशपॉन्ड) में दोबारा राख डाले जाने से आसपास के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ग्रामीणों के विरोध और तत्कालीन पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे के निर्देश पर बंद किए गए इस तालाब में महाजेनको द्वारा फिर से राख डाले जाने का आरोप है। तालाब भर जाने के कारण राख मिला पानी आसपास की जमीन में रिस रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि इससे करीब 50 से 60 एकड़ क्षेत्र प्रभावित हुआ है। जलस्रोतों में मछलियों की मौत और राख के दलदल में फंसने से गाय-भैंस की जान जाने की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
राख के दलदल में फंसे मवेशी, गाय और भैंस की मौत
ग्रामीणों के अनुसार, पिछले सप्ताह चराई के लिए गई कुछ गायें और भैंस राख के गाढ़े दलदल में फंस गई थीं। स्थानीय लोगों ने जेसीबी की मदद से उन्हें बाहर निकाला, लेकिन गंभीर रूप से घायल एक गाय की दो दिन पहले मौत हो गई। करीब 15 दिन पहले दलदल में फंसी एक भैंस की भी मौत होने की जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग करते हुए राख डालने का काम बंद करने की मांग की है।
50 से 60 एकड़ क्षेत्र में प्रदूषण फैलने का दावा
ग्रामीणों का आरोप है कि बारिश के मौसम से महाजेनको ने ऐशपॉन्ड में फिर से राख डालना शुरू किया। तालाब पूरी तरह भर जाने के कारण राख मिला पानी आसपास की जमीन में रिस रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इससे खेतों और आसपास के जलस्रोतों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि राख के प्रदूषण और पानी के तापमान में बदलाव के कारण जलस्रोतों में मछलियां मर रही हैं।
पेंच नदी तक प्रदूषण पहुंचने की आशंका
नांदगांव ऐशपॉन्ड से करीब 150 से 200 मीटर की दूरी पर पेंच नदी स्थित है। ग्रामीणों और पर्यावरण से जुड़े लोगों ने आशंका जताई है कि राख मिला पानी नदी और आसपास के जलस्रोतों को प्रदूषित कर सकता है।
सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की लीना बुद्धे ने आरोप लगाया कि राख के वैज्ञानिक तरीके से निपटान के लिए आवश्यक व्यवस्था किए बिना उसे गड्ढे में डाला जा रहा है। उनका कहना है कि राख को जमीन में रिसने से रोकने के लिए जरूरी लाइनिंग और उपयुक्त संरचना नहीं होने से प्रदूषण का खतरा बढ़ रहा है।
पांच साल पहले बांध टूटने से खेतों को हुआ था नुकसान
ग्रामीणों के मुताबिक, करीब पांच साल पहले ऐशपॉन्ड का बांध टूटने से राख मिला पानी खेतों में घुस गया था। इससे कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा था और पेंच नदी के प्रदूषण को लेकर भी चिंता पैदा हुई थी। उस समय ग्रामीणों की शिकायतों के बाद तत्कालीन पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने क्षेत्र का दौरा किया था और तालाब में राख डालना बंद करने के निर्देश दिए थे। अब दोबारा राख डाले जाने से पुराने खतरे फिर सामने आने की आशंका जताई जा रही है।
ग्राम पंचायत की अनुमति नहीं लेने का आरोप
नांदगांव के सरपंच मिलिंद देशभ्रतार के अनुसार, राख डालने के लिए ग्राम पंचायत से अनुमति नहीं ली गई है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत की ओर से महाजेनको को प्रस्ताव भेजा जाएगा। यदि राख डालना बंद नहीं किया गया, तो आंदोलन किया जाएगा।
ग्रामीण अशोक लाचुरे ने आरोप लगाया कि शिकायत करने पर महाजेनको के अधिकारियों ने कथित तौर पर अदालत से आदेश लाने के बाद ही काम बंद करने की बात कही। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि स्थिति पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो भविष्य में लोगों को राख मिले पानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
मुआवजे और राख डालना बंद करने की मांग
नांदगांव और आसपास के ग्रामीणों ने प्रभावित जमीन, जलस्रोतों और पशुधन को हुए नुकसान की जांच कराने की मांग की है। उनकी मांग है कि प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा दिया जाए और ऐशपॉन्ड में राख डालने की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए। मामले में प्रदूषण की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी तय करने के लिए संबंधित विभागों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

