नागपुर: नागपुर विभागीय पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव परिणाम के बाद भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले के नाम के सामने बड़ी संख्या में मतपत्रों पर केवल ‘2’ लिखे जाने का मामला चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार, 8 हजार से अधिक मतपत्रों पर केवल ‘2’ दर्ज होने के कारण वे अवैध घोषित किए गए। इस घटनाक्रम ने भाजपा के चुनावी आकलन और मतदान प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इसके पीछे मतदाताओं की गलती थी या किसी राजनीतिक रणनीति का प्रभाव, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
8 हजार से अधिक मतपत्रों पर एक जैसी गलती
मतगणना के दौरान सामने आए विवरण के अनुसार, सुधाकर कोहले के नाम के सामने कई मतदाताओं ने केवल ‘2’ लिखा, जबकि पहली पसंद दर्शाने के लिए नियमानुसार ‘1’ दर्ज करना आवश्यक था। पहली पसंद का क्रमांक नहीं लिखे जाने के कारण संबंधित मतपत्र अवैध हो गए।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 8 हजार से अधिक मतपत्रों पर इसी तरह का पैटर्न देखने को मिला। इतनी बड़ी संख्या में एक जैसी गलती सामने आने से भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच इस विषय पर चर्चा शुरू हो गई।
4,294 मतों की बढ़त के बावजूद चुनावी समीकरण बदले
मतगणना के शुरुआती दो दौर के बाद भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले 4,294 मतों से आगे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि संबंधित मतपत्रों पर नियमों के अनुसार पसंदीक्रम दर्ज किया गया होता और वे वैध माने जाते, तो कोहले की बढ़त 12 हजार से अधिक हो सकती थी।
हालांकि, अवैध मतों को किसी उम्मीदवार के पक्ष में निश्चित रूप से नहीं जोड़ा जा सकता। इसलिए यह कहना कि इन मतपत्रों के वैध होने पर चुनाव परिणाम निश्चित रूप से अलग होता, उपलब्ध जानकारी के आधार पर संभव नहीं है।
भाजपा की चुनावी तैयारी के बावजूद सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने मतदाता पंजीकरण, बूथ स्तर पर प्रबंधन और मतदान के दिन मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने के लिए व्यापक तैयारी की थी। कई स्थानों पर मतदाताओं को मतपत्र पर पसंदीक्रम दर्ज करने की प्रक्रिया भी समझाई गई थी।
इसके बावजूद बड़ी संख्या में मतपत्रों का अवैध होना पार्टी के चुनावी प्रबंधन के लिए चिंता का विषय बन गया। अब इस बात पर चर्चा हो रही है कि मतदाताओं तक मतदान प्रक्रिया से संबंधित निर्देश कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचे थे।
अनिल सोले की नाराजगी और बगावत की भी चर्चा
भाजपा में उम्मीदवार चयन के बाद पूर्व विधायक अनिल सोले की नाराजगी और बगावत भी चर्चा में रही थी। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व विधायक गिरीश व्यास सहित कुछ पुराने कार्यकर्ताओं ने भी उनका समर्थन किया था। सोले ने पार्टी में पुराने कार्यकर्ताओं को उचित अवसर देने का मुद्दा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने उठाया था।
इस राजनीतिक पृष्ठभूमि में कुछ सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या मतपत्रों पर एक जैसे क्रमांक दर्ज होने की घटना का पार्टी के आंतरिक असंतोष से कोई संबंध था। हालांकि, इस संबंध में कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए इसे फिलहाल अटकल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सुधाकर कोहले ने भी जताई हैरानी
रिपोर्ट में सुधाकर कोहले के हवाले से बताया गया है कि इतनी बड़ी संख्या में मतपत्रों पर एक जैसा पैटर्न सामने आना उनके लिए बड़ा झटका था। उन्होंने इस घटनाक्रम को हैरान करने वाला बताया।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि इन मतपत्रों पर केवल ‘2’ लिखे जाने के पीछे कोई संगठित प्रयास था या मतदाताओं ने मतदान प्रक्रिया को समझने में गलती की। मामले में किसी राजनीतिक साजिश की पुष्टि नहीं हुई है।
मतपत्रों के पैटर्न ने खड़े किए कई सवाल
नागपुर पदवीधर चुनाव में अवैध मतों की बड़ी संख्या और सुधाकर कोहले के नाम के सामने केवल ‘2’ लिखे जाने का मामला चुनावी चर्चा का विषय बना हुआ है। इस घटनाक्रम ने मतदाताओं को सही जानकारी देने, पसंदीक्रम दर्ज करने की प्रक्रिया और चुनावी प्रबंधन की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए ठोस साक्ष्य और आधिकारिक जानकारी आवश्यक होगी।

