गांधी विचारधारा को नए दौर से जोड़ा गया
नागपुर: सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह, स्वदेशी, सर्वोदय, ग्राम स्वराज, नैतिकता और आत्मशुद्धि जैसे सिद्धांतों के आधार पर महात्मा गांधी ने जीवन की व्यापक दृष्टि प्रस्तुत की थी। इन्हीं विचारों को आधुनिक समय से जोड़ते हुए राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के गांधी विचारधारा विभाग ने अपने एमए पाठ्यक्रम में कई नए विषय शामिल किए हैं।
तनाव और आपदा प्रबंधन भी पाठ्यक्रम का हिस्सा
नए पाठ्यक्रम में ‘गांधीवादी आपदा एवं तनाव प्रबंधन’ (Gandhian Way of Disaster and Stress Management), ‘गांधीवादी प्रबंधन’ (Gandhian Way of Management) और ‘गांधी एवं पत्रकारिता’ जैसे विषय शामिल किए गए हैं। बदलती जीवनशैली में तनाव प्रबंधन की आवश्यकता और गांधीवादी तरीकों से संस्थाओं एवं आंदोलनों के संचालन का अध्ययन विद्यार्थियों को कराया जा रहा है।
शिक्षक से लेकर डॉक्टर और वकील तक ले रहे शिक्षा
गांधी विचारधारा विभाग में वर्तमान में शिक्षक, प्राध्यापक, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और युवा विद्यार्थी गांधीवादी विचारों का अध्ययन कर रहे हैं। विभाग की स्थापना करीब 47 वर्ष पहले हुई थी और बदलती पीढ़ियों के बावजूद गांधी विचारधारा के प्रति रुचि बनी हुई है।
78 वर्षीय विद्यार्थी भी कर रहे गांधी विचारों का अध्ययन
विभाग में 78 वर्षीय डॉ. ईश्वर नंदापुरे भी विद्यार्थी के रूप में गांधी विचारधारा का अध्ययन कर रहे हैं। उनका कहना है कि गांधी विचार केवल कुछ सिद्धांतों का समूह नहीं, बल्कि व्यक्ति से विश्वमानव और आत्मशांति से विश्वशांति तक फैली व्यापक जीवनदृष्टि है।
गांधी के बाद के अहिंसक आंदोलनों का भी अध्ययन
नए पाठ्यक्रम में गांधी के बाद भारत और विदेशों में हुए अहिंसक आंदोलनों को भी शामिल किया गया है। विद्यार्थियों को यह समझाया जाता है कि गांधी ने न्यायपूर्ण मांगों के लिए हिंसा या हथियारों के बजाय सत्य, दृढ़ विश्वास और निर्भयता को माध्यम बनाया।
तीन साल से प्रवेश क्षमता पूरी
गांधी विचारधारा विभाग में पिछले तीन वर्षों से प्रवेश क्षमता पूरी हो रही है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में एमए प्रथम वर्ष में 21 और द्वितीय वर्ष में 16 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। बढ़ती मांग को देखते हुए इस वर्ष प्रथम वर्ष की प्रवेश क्षमता बढ़ाकर 25 सीट कर दी गई है।
एमए द्वितीय वर्ष में शोध परियोजना
एमए के चौथे सत्र में शोध पद्धति और शोध परियोजना कार्य को शामिल किया गया है। इसके माध्यम से विद्यार्थी गांधी विचारधारा से जुड़े विभिन्न विषयों पर स्वतंत्र रूप से शोध कर सकेंगे।
जीवन कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर
गांधी विचारधारा विभाग के प्रमुख डॉ. प्रमोद वाटकर के अनुसार, इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं है। गांधीजी के रचनात्मक कार्यों और विचारों को समझने से विद्यार्थियों में जीवन प्रबंधन, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय दायित्व की भावना विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

