अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब कैंसर मरीजों पर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रहे युद्ध जैसे हालातों का असर अब भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (मेडिकल) में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जीवनरक्षक दवाओं की भारी कमी पैदा हो गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अस्पताल में अब केवल एक दिन का दवा स्टॉक बचा है।
कीमोथेरेपी प्रभावित होने का खतरा
मेडिकल के कैंसर विभाग में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीजों को कीमोथेरेपी दी जाती है। लेकिन दवाओं की कमी के कारण कई मरीजों के इलाज पर संकट मंडराने लगा है। यदि जल्द आपूर्ति नहीं हुई तो कैंसर मरीजों की नियमित कीमोथेरेपी प्रभावित हो सकती है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
चीन सहित अन्य देशों से कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित
विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर की दवाओं के निर्माण में उपयोग होने वाला कच्चा माल मुख्य रूप से चीन और अन्य विदेशी देशों से आयात किया जाता है। वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिससे देश में दवा उत्पादन पर असर पड़ा है और बाजार में उपलब्धता कम हो गई है।
केवल 15 से 20 मरीजों के लिए बची दवाएं
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में मेडिकल के कैंसर विभाग में केवल इतनी दवाएं उपलब्ध हैं कि 15 से 20 मरीजों को कीमोथेरेपी दी जा सके। यह मात्रा अस्पताल की औसत दैनिक आवश्यकता के बराबर है, यानी मौजूदा स्टॉक केवल एक दिन के लिए पर्याप्त है।
आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर सबसे बड़ा संकट
विदर्भ क्षेत्र के हजारों कैंसर मरीज सरकारी योजनाओं के तहत मेडिकल में इलाज करवाते हैं। दवाओं की कमी का सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ सकता है, क्योंकि निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च काफी अधिक होता है।
दवाओं की मांग के लिए प्रस्ताव भेजा गया
मेडिकल प्रशासन ने आवश्यक दवाओं की आपूर्ति के लिए संबंधित विभागों को प्रस्ताव भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द से जल्द दवाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि मरीजों का उपचार प्रभावित न हो।
मेडिकल प्रशासन ने क्या कहा?
डॉ. विजय मोहबिया, समन्वयक, महात्मा ज्योतिबा फुले जनआरोग्य योजना, ने बताया कि युद्धजन्य परिस्थितियों के कारण कैंसर की दवाओं के लिए आवश्यक कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि फिलहाल अस्पताल में सीमित मात्रा में दवाएं उपलब्ध हैं और मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
मरीजों और परिजनों में बढ़ी चिंता
दवा संकट की खबर सामने आने के बाद कैंसर मरीजों और उनके परिजनों में चिंता का माहौल है। सभी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन कितनी जल्दी दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित कर पाता है और मरीजों के इलाज को निर्बाध बनाए रखता है।

