नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में बढ़ा आर्थिक बोझ
नागपुर में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों पर महंगाई का एक और बड़ा बोझ पड़ गया है। बढ़ती पेट्रोल और डीजल कीमतों का हवाला देते हुए स्कूल बस संचालकों ने मासिक शुल्क में सीधे 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के बाद अब प्रत्येक छात्र के लिए अभिभावकों को हर महीने लगभग 200 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे।
महंगी शिक्षा के बीच बढ़ी परिवहन लागत
पहले से ही निजी स्कूलों की बढ़ी हुई फीस, महंगे स्कूल बैग, किताबें, कॉपियां और अन्य शैक्षणिक सामग्री के कारण परेशान अभिभावकों को अब स्कूल बस फीस वृद्धि ने और मुश्किल में डाल दिया है। मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट पूरी तरह प्रभावित होता दिखाई दे रहा है।
नागपुर में हजारों स्कूल बसें सड़कों पर दौड़ रहीं
जानकारी के अनुसार नागपुर शहर और ग्रामीण क्षेत्र में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के रिकॉर्ड में करीब साढ़े तीन हजार अधिकृत स्कूल बसें दर्ज हैं। हालांकि वास्तविकता में इसके अलावा बड़ी संख्या में अनधिकृत स्कूल बसें, मैजिक वाहन और वैन भी छात्रों को ढोने का काम कर रही हैं।
सुरक्षा नियमों की खुलेआम अनदेखी
सरकार द्वारा छात्रों की सुरक्षित आवाजाही के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं, लेकिन शहर में इन नियमों का पालन नहीं होने के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। कई वाहनों में क्षमता से दोगुने-तीन गुना तक बच्चों को बैठाया जा रहा है। वहीं कुछ वाहनों के पास फिटनेस प्रमाणपत्र तक नहीं होने की बात भी सामने आई है।
अभिभावकों में बढ़ा आक्रोश
एक तरफ बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बढ़ी हुई फीस वसूलने की मजबूरी से अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि जब सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं है, तब अतिरिक्त शुल्क लेना उचित नहीं है।

