कोयला घोटाले में घिरी रेलवे: CBI जांच तेज, अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार

नागपुर में सामने आए कोयला हेराफेरी मामले ने रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। CBI जांच में सैंपल के ‘कोयला’ होने की पुष्टि के बाद अब कई अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की आशंका गहरा गई है।

कोयले के सैंपल की पुष्टि से बढ़ी मुश्किलें

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा लैब में भेजे गए सैंपल के ‘कोयला’ होने की पुष्टि हो चुकी है। इस पुष्टि के बाद एसईसी रेलवे के अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है
CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस हेराफेरी से किन-किन लोगों को लाभ पहुंचा और इसमें कौन-कौन शामिल है। एजेंसी किसी भी समय इस मामले में आपराधिक केस दर्ज कर सकती है

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क्या है पूरा मामला?

  • वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) द्वारा एसईसी रेलवे के डुमरी रेलवे साइडिंग पर कोयला भेजा जाता है।
  • वैगन और रेलवे ट्रैक की सफाई के लिए WCL ने एक ठेकेदार नियुक्त किया था
  • इसके अलावा रेलवे ने भी अलग से एक दूसरा ठेकेदार नियुक्त कर दिया
  • WCL ने इस पर आपत्ति जताई, लेकिन रेलवे प्रशासन ने इसे नजरअंदाज कर दिया
  • संदेह जताया गया कि वेस्ट/डेबरी और कोयले की धूल के नाम पर असल कोयले की हेराफेरी हो रही है।

CBI की छापेमारी में बड़ा खुलासा

  • WCL की शिकायत के बाद रेलवे विजिलेंस और CBI नागपुर ने संयुक्त कार्रवाई की।
  • 25 मई की शाम डुमरी रेलवे साइडिंग पर छापा मारा गया।
  • इस दौरान करीब 1427 मीट्रिक टन कोयला जब्त किया गया
  • जब्त सैंपल को जांच के लिए लैब भेजा गया, जहां से अब इसकी पुष्टि हो चुकी है।
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रेलवे अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में

CBI अब इस मामले में रेलवे अधिकारियों की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष भूमिका की गहन जांच कर रही है।

  • ठेकेदार पर कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है।
  • यह भी जांच हो रही है कि ठेकेदार की नियुक्ति के पीछे किसका हाथ था
  • इस पूरी प्रक्रिया से किसे आर्थिक लाभ हुआ, इसका आकलन किया जा रहा है।
  • साथ ही, WCL को हुए नुकसान का भी मूल्यांकन किया जा रहा है।

तीन महीने तक चलती रही हेराफेरी

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि करीब तीन महीने से अधिक समय तक ‘वेस्ट’ और ‘डेबरी’ के नाम पर कोयले की हेराफेरी जारी थी। इस दौरान बड़े पैमाने पर कोयले के गलत उपयोग और गबन की आशंका जताई जा रही है।

इस पूरे मामले ने रेलवे और कोयला परिवहन व्यवस्था में भ्रष्टाचार और निगरानी की कमी को उजागर कर दिया है। अब सभी की नजरें CBI की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जो इस घोटाले में शामिल लोगों की जिम्मेदारी तय करेगी।

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