Nagpur स्थित राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में परीक्षा संचालन, डिजिटल मूल्यांकन और परिणाम प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इस पूरे मामले में हैदराबाद की कोएम्ट एज्युकेट प्रा. लि. कंपनी की भूमिका पर सवाल उठने के बाद शिक्षा क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है।
परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी और परिणाम में देरी के आरोप
विश्वविद्यालय द्वारा कोट्यवधी रुपये के कंत्राट पर नियुक्त इस कंपनी पर परीक्षा प्रबंधन से जुड़ी कई खामियों के आरोप लगाए जा रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि परिणाम में देरी, प्रवेश पत्रों में त्रुटियां और डिजिटल सिस्टम में तकनीकी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं।
5 करोड़ रुपये के तीन वर्षीय कंत्राट पर विवाद
जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय ने परीक्षा संचालन और डिजिटल मूल्यांकन के लिए लगभग 5 करोड़ रुपये का तीन वर्षीय कंत्राट कोएम्ट एज्युकेट प्रा. लि. को सौंपा था। इसके बाद से ही परीक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार शिकायतें दर्ज की जा रही हैं।
- प्रवेश पत्रों में त्रुटियों की शिकायतें
- परिणाम घोषित करने में देरी
- ऑनलाइन सिस्टम में तकनीकी दिक्कतें
- छात्रों को असुविधा का सामना
निविदा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल और जांच की मांग
छात्र संगठनों ने कंपनी की पात्रता, अनुभव और निविदा प्रक्रिया में बदलाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि निविदा शर्तों में बदलाव कर चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया।
- छात्रों की संख्या के आंकड़ों में बदलाव के आरोप
- टर्नओवर मानदंडों में संशोधन पर सवाल
- दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया पर संदेह
- पूरी निविदा प्रक्रिया की जांच की मांग
छात्र संगठनों का विरोध और शिकायतें
एनएसयूआई सहित कई छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। छात्रों का कहना है कि इस लापरवाही का सीधा असर उनके शैक्षणिक भविष्य पर पड़ रहा है।
कुलगुरु का बयान: पारदर्शिता और जांच समिति का गठन
Dr. Manali Kshirsagar ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए विशेष ‘वार रूम’ स्थापित किया गया है। साथ ही कोएम्ट एज्युकेट प्रा. लि. से जुड़े मामलों की जांच के लिए समिति गठित की गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और भविष्य में विश्वविद्यालय स्वयं परीक्षा संचालन की प्रक्रिया अपनाने की दिशा में काम कर रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर विवाद से बढ़ा मामला
सीबीएसई के सीबीसीएसई ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली से जुड़े विवादों में भी इस कंपनी का नाम सामने आने के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने विश्वविद्यालय की स्थानीय समस्याओं को भी और गंभीर बना दिया है।

