एक साल तक सोना-चांदी की खरीद टालने की अपील के बाद बढ़ी चिंता
नागपुर : प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा नागरिकों से अगले एक वर्ष तक अनावश्यक सोना-चांदी की खरीदारी टालने की अपील के बाद देशभर के सराफा बाजार और ज्वेलरी उद्योग में चिंता का माहौल बन गया है। उद्योग से जुड़े व्यापारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि इस अपील का असर केवल सोने की बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे लाखों लोगों के रोजगार पर भी संकट खड़ा हो सकता है।
ज्वेलरी इंडस्ट्री से जुड़े हैं लाखों परिवार
देश का ज्वेलरी उद्योग केवल सोना बेचने तक सीमित नहीं है। इसके साथ कारागीर, डिजाइनर, छोटे व्यापारी, पैकेजिंग कंपनियां, ट्रांसपोर्ट, सुरक्षा सेवाएं, बैंकिंग और कई लघु उद्योग जुड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की मांग में बड़ी गिरावट आती है तो पूरी आर्थिक श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।
शादी सीजन पर पड़ सकता है बड़ा असर
भारत में शादी और पारिवारिक आयोजनों में सोने की खरीद पारंपरिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री की अपील के बाद ग्राहकों के खरीदारी टालने की संभावना बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि इससे छोटे ज्वेलर्स और कारीगरों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
सरकार की चिंता : विदेशी मुद्रा पर बढ़ता दबाव
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल और सोना विदेशों से आयात करता है। लगातार बढ़ती तेल कीमतों और वैश्विक तनाव के बीच सरकार विदेशी मुद्रा बचाने की कोशिश कर रही है। इसी कारण पेट्रोल-डीजल की बचत और सोने की खरीद कम करने की अपील की गई है।
शेयर बाजार में भी दिखा असर
प्रधानमंत्री की अपील के बाद सोमवार को कई बड़ी ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स और सेनको गोल्ड जैसी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई, जिससे निवेशकों में भी चिंता बढ़ गई है।
उद्योग जगत ने सरकार से संवाद की मांग की
ज्वेलरी कारोबार से जुड़े संगठनों ने सरकार से इस मुद्दे पर चर्चा करने की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि अगर लंबे समय तक बाजार में डर का माहौल बना रहा तो छोटे कारोबारियों और कारीगरों को कर्मचारियों की छंटनी तक करनी पड़ सकती है।

