दानापूर-सिकंदराबाद एक्सप्रेस में नागपुर की महिलाओं से अश्लील हरकत: 20 घंटे तक झेली यातना, आरोपी अब भी फरार

नागपुर: रेल यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वाराणसी से नागपुर लौट रही तीन परिवारों की महिलाओं के साथ ट्रेन के आरक्षित डिब्बे में छेड़छाड़ और अश्लील हरकतों का मामला सामने आया है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। पीड़ितों का आरोप है कि रेलवे हेल्पलाइन, अधिकारियों और पुलिस से बार-बार शिकायत के बावजूद कोई समय पर मदद नहीं मिली

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आरक्षित डिब्बे में 400 से ज्यादा अनधिकृत यात्रियों का कब्जा

मिली जानकारी के अनुसार, नागपुर के तीन परिवारों के 14 सदस्य 27 जून को धार्मिक यात्रा पर उत्तर प्रदेश और बिहार गए थे। वापसी के दौरान जब वे दानापूर-सिकंदराबाद एक्सप्रेस में सवार होने पहुंचे, तो पाया कि 72 सीटों वाले आरक्षित डिब्बे में 400 से अधिक बिना टिकट और अनधिकृत यात्रियों ने कब्जा कर रखा था। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि खड़े होने तक की जगह नहीं थी।

गर्दी का फायदा उठाकर महिलाओं से की छेड़छाड़

भीड़ के बीच जैसे-तैसे डिब्बे में घुसी महिलाओं को अपनी सीट तक पहुंचने में भारी परेशानी हुई। इसी दौरान कुछ अज्ञात आरोपियों ने भीड़ का फायदा उठाकर महिलाओं के साथ अश्लील हरकतें और छेड़छाड़ की

रात में लाइट बंद होते ही बढ़ी बदसलूकी

रात के समय जब डिब्बे की लाइट बंद हुई, तब आरोपियों का दुस्साहस और बढ़ गया। सो रही महिलाओं के साथ दोबारा अश्लील हरकतें की गईं, जिससे भय और असुरक्षा का माहौल और गहरा गया।

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डिजिटल शिकायतों पर भी नहीं मिली मदद

घटना के बाद पीड़ितों ने तुरंत रेलवे हेल्पलाइन 139 और आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (X) पर शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, कार्रवाई का आश्वासन तो मिला, लेकिन मौके पर कोई सहायता नहीं पहुंची, जिससे यात्रियों में आक्रोश फैल गया।

नैनी स्टेशन पर ट्रेन रोककर किया प्रदर्शन

लगातार हो रही घटनाओं और प्रशासन की निष्क्रियता से नाराज होकर परिवार ने नैनी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रोक दी और इंजन के सामने खड़े होकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होगी, ट्रेन आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी

पुलिस का विवादित जवाब, 20 घंटे तक झेली परेशानी

पीड़ितों का आरोप है कि मौके पर मौजूद रेलवे पुलिस ने गंभीरता दिखाने के बजाय कहा कि 400 लोगों में से आरोपी आप खुद पहचानें। टीटीई और पुलिस से सहयोग न मिलने के कारण महिलाओं को करीब 20 घंटे तक उसी माहौल में सफर करने को मजबूर होना पड़ा और वे किसी तरह नागपुर पहुंचीं।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना के बाद रेलवे प्रशासन और यात्री सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोगों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए

इस घटना पर आपकी क्या राय है? क्या रेल यात्राओं में सुरक्षा के लिए और सख्त कदम उठाए जाने चाहिए? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में जरूर दें।

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