पुलिस और एनआईए अधिकारी बनकर बनाया दबाव
नागपुर में साइबर अपराधियों ने पुलिस और जांच एजेंसी के अधिकारियों का रूप धारण कर दो सेवानिवृत्त बुजुर्गों को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जाल में फंसाकर कुल 1.07 करोड़ रुपये की ठगी की। आरोपियों ने दोनों पीड़ितों को गंभीर अपराधों से जोड़ने और गिरफ्तारी का डर दिखाकर आरटीजीएस के जरिए रकम ट्रांसफर कराई।
मुंबई पुलिस का अधिकारी बनकर 20.10 लाख की ठगी
पहले मामले में सहकारनगर, धंतोली निवासी 70 वर्षीय सेवानिवृत्त व्यक्ति को 23 और 24 सितंबर के बीच निशाना बनाया गया। आरोपियों ने फोन और वीडियो कॉल के जरिए खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस थाने का अधिकारी बताया।
आतंकवाद से संबंध बताकर डराया
साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर बुजुर्ग को बताया कि उनके आतंकवादियों से संबंध हैं और मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसके बाद उनके नाम पर गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कही गई। बैंक खाते के सत्यापन के बहाने आरोपियों ने उनसे 20,10,200 रुपये आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर करा लिए।
बाद में ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने साइबर पुलिस से शिकायत की।
एनआईए अधिकारी बनकर 82 वर्षीय बुजुर्ग को बनाया निशाना
दूसरे मामले में खरे टाउन, धरमपेठ निवासी 82 वर्षीय सेवानिवृत्त व्यक्ति से कथित तौर पर 87.50 लाख रुपये ठग लिए गए। पीड़ित को 1 सितंबर को एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सऐप वीडियो कॉल आया था।
दिल्ली बम धमाके से जोड़कर गिरफ्तारी की धमकी
कॉल करने वाले ने खुद को एनआईए की एटीएस शाखा का अधिकारी बताया और दावा किया कि पीड़ित का नाम दिल्ली में हुए बम धमाके से जुड़े मामले में सामने आया है। आरोपियों ने यह भी दावा किया कि उनके नाम से जुड़े आईसीआईसीआई बैंक खाते और एटीएम कार्ड के माध्यम से 2.5 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है और उन्हें 25 लाख रुपये कमीशन के रूप में मिले हैं।
फर्जी दस्तावेज दिखाकर कराया रकम ट्रांसफर
आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ित को फर्जी आईसीआईसीआई बैंक स्टेटमेंट, वीजा कार्ड और कथित आरबीआई वारंट दिखाए। इसके बाद पीड़ित और उनकी पत्नी को लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया। आरोपियों ने तीन बैंक खातों की जानकारी देकर आरटीजीएस के माध्यम से रकम ट्रांसफर करने का दबाव बनाया। इसके बाद पीड़ित ने 87.50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
दोनों मामलों में अपनाया गया एक जैसा तरीका
पुलिस के अनुसार, दोनों मामलों में साइबर अपराधियों ने लोगों को डराने के लिए कई समान तरीकों का इस्तेमाल किया। इनमें पुलिस या जांच एजेंसी के अधिकारी बनना, गिरफ्तारी की धमकी देना, आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़ना, फर्जी दस्तावेज दिखाना और रकम को ‘सत्यापन’ के नाम पर ट्रांसफर कराना शामिल है।
साइबर पुलिस कर रही बैंक खातों और आरोपियों की जांच
ठगी का पता चलने के बाद दोनों पीड़ितों ने पुलिस से संपर्क किया। साइबर पुलिस ने अलग-अलग मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आरोपियों की पहचान करने के साथ उन बैंक खातों और लेनदेन की भी जांच कर रही है, जिनके माध्यम से कथित तौर पर ठगी की रकम ट्रांसफर कराई गई।

