25 से 34 वर्ष की महिलाओं में सबसे अधिक मामले; सितंबर में 1,006 गर्भपात निजी अस्पतालों और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से दर्ज
नागपुर: परिवार नियोजन और गर्भनिरोधक साधनों के इस्तेमाल को लेकर जागरूकता बढ़ने के बावजूद शहर में अनियोजित गर्भधारण का मुद्दा सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर महीने में नागपुर में कुल 1,064 गर्भपात दर्ज किए गए। इनमें से 1,006 मामले निजी अस्पतालों और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से, जबकि 58 मामले सरकारी अस्पतालों में दर्ज हुए। रिपोर्ट में 814 मामलों में गर्भनिरोधक साधनों के विफल होने को गर्भपात का कारण बताया गया है। यह जानकारी राज्य स्वास्थ्य सेवा के अतिरिक्त निदेशक को भेजी गई रिपोर्ट में सामने आई है।
25 से 34 वर्ष की महिलाओं में सबसे अधिक मामले
सितंबर में दर्ज गर्भपात के मामलों में 25 से 29 वर्ष की 356 महिलाएं और 30 से 34 वर्ष की 330 महिलाएं शामिल थीं। इस तरह इन दोनों आयु वर्गों में कुल 686 मामले दर्ज किए गए।
अन्य आयु वर्गों में 20 से 24 वर्ष की 146 महिलाएं, 35 से 39 वर्ष की 170 महिलाएं और 15 से 19 वर्ष की 12 महिलाएं शामिल थीं। आंकड़े बताते हैं कि दर्ज मामलों में 25 से 34 वर्ष की महिलाओं की संख्या सबसे अधिक रही।
पहले 12 सप्ताह में 943 गर्भपात
गर्भावस्था की अवधि के अनुसार, अधिकतर गर्भपात पहले 12 सप्ताह के भीतर दर्ज किए गए।
- 9 सप्ताह तक: 507 मामले
- 9 से 12 सप्ताह: 436 मामले
- 12 से 20 सप्ताह: 80 मामले
- 20 से 24 सप्ताह: 23 मामले
- गर्भावस्था की अवधि उपलब्ध नहीं: 18 मामले
पहले 12 सप्ताह में कुल 943 गर्भपात दर्ज हुए, जो कुल मामलों का लगभग 88.6 प्रतिशत है।
814 मामलों में गर्भनिरोधक साधन विफल होने की जानकारी
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में गर्भपात के कारणों का वर्गीकरण भी किया गया है। इसके अनुसार, सबसे अधिक 814 मामलों में गर्भनिरोधक साधनों के विफल होने की जानकारी दर्ज की गई।
अन्य कारणों में गर्भवती महिला के शारीरिक स्वास्थ्य को गंभीर खतरा होने के 125 मामले, मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर खतरा होने के 33 मामले और महिला के जीवन को खतरा होने के 27 मामले शामिल हैं।
इसके अलावा, बलात्कार के कारण हुई गर्भावस्था के 4 मामले दर्ज किए गए। जन्म लेने वाले बच्चे में गंभीर शारीरिक या मानसिक दिव्यांगता का अधिक जोखिम होने से संबंधित 57 मामले भी रिपोर्ट में शामिल हैं। शेष 4 मामलों में कारण उपलब्ध नहीं था।
निजी अस्पतालों में दर्ज हुए अधिकांश मामले
कुल 1,064 मामलों में से 1,006 गर्भपात निजी अस्पतालों और स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से दर्ज किए गए, जबकि सरकारी अस्पतालों में 58 मामले दर्ज हुए। इस प्रकार कुल मामलों में निजी अस्पतालों और स्वयंसेवी संस्थाओं की हिस्सेदारी लगभग 94.5 प्रतिशत रही।
सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में दर्ज मामलों का अनुपात तुलनात्मक रूप से कम रहा। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सरकारी अस्पतालों में गर्भपात कम हुए या वहां रिपोर्टिंग का स्तर अलग था।
अनियोजित गर्भधारण पर जागरूकता की जरूरत
ये आंकड़े गर्भनिरोधक साधनों के प्रभावी इस्तेमाल, परिवार नियोजन संबंधी परामर्श और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के महत्व को रेखांकित करते हैं। गर्भनिरोधक साधनों के विफल होने के कारणों और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की भूमिका को बेहतर ढंग से समझने के लिए विस्तृत अध्ययन जरूरी है।

