नागपुर: नागपुर विभागीय पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना में सामने आए आंकड़ों ने मतदान प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस चुनाव में कुल 1 लाख 65 हजार 906 मतों में से 15 हजार 32 मत अवैध घोषित किए गए। यानी लगभग हर 11 मतों में से एक मत नियमों के अनुसार दर्ज नहीं होने के कारण रद्द हो गया। वर्ष 2020 के चुनाव में अवैध मतों का आंकड़ा 11 हजार 540 था, जो इस बार बढ़कर 15 हजार 32 तक पहुंच गया।
15 हजार से अधिक मत हुए अवैध
मतगणना के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नागपुर विभागीय पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र में कुल 1,65,906 मतों में से 1,50,874 मत वैध पाए गए, जबकि 15,032 मत अवैध घोषित किए गए। इतनी बड़ी संख्या में मत रद्द होने से मतदान प्रक्रिया और मतदाताओं को दिए गए निर्देशों की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
पहली और दूसरी फेरी में कितने मत हुए रद्द?
मतगणना के दौरान पहली फेरी में 7,128 मत, जबकि दूसरी फेरी में 7,904 मत अवैध पाए गए। चुनाव में जीत के लिए निर्धारित कोटा 75,438 मतों का था। अवैध मतों की संख्या को देखते हुए मतपत्र पर सही तरीके से पसंदीदा उम्मीदवारों का क्रम दर्ज करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गई है।
मतपत्र पर गलत निशान लगाने से रद्द हुए वोट
इस चुनाव में मतदाताओं को उम्मीदवारों के लिए अपनी पसंद के अनुसार क्रमांक दर्ज करना आवश्यक था। हालांकि, मतगणना के दौरान कई मतपत्रों पर नियमों के विपरीत निशान पाए गए। कुछ मतदाताओं ने पसंदीदा क्रमांक लिखने के बाद उसके चारों ओर गोला बना दिया, जबकि कुछ ने क्रमांक लिखने के बजाय उम्मीदवार के नाम के सामने राइट का निशान लगा दिया।
इसके अलावा, कुछ मतपत्रों पर केवल ‘2’ अंक दर्ज किया गया और पहली पसंद का क्रमांक नहीं लिखा गया। ऐसे मामलों में मतदाता की पसंद स्पष्ट होने के बावजूद निर्धारित नियमों के अनुसार मतपत्र वैध नहीं माना गया।
2020 के चुनाव का रिकॉर्ड भी टूटा
वर्ष 2020 के नागपुर विभागीय पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में 11,540 मत अवैध घोषित किए गए थे। इस बार यह संख्या बढ़कर 15,032 हो गई। यानी पिछली चुनाव प्रक्रिया की तुलना में अवैध मतों में 3,492 की वृद्धि दर्ज की गई।
यह बढ़ोतरी मतदाताओं तक मतदान प्रक्रिया से संबंधित जानकारी पहुंचाने और उसे सही तरीके से समझाने की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
प्रचार के बावजूद मतदान प्रक्रिया में हुई गलतियां
चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की प्रचार टीमों की ओर से मतदान की प्रक्रिया समझाने का दावा किया जाता है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मतपत्रों का अवैध घोषित होना चिंता का विषय बना हुआ है। पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र में मतदान करने वाले मतदाताओं के लिए मतपत्र पर सही क्रमांक दर्ज करना आवश्यक था, लेकिन कई मतदाताओं ने इस प्रक्रिया में गलतियां कीं।
अभिजीत वंजारी की जीत के बाद परिवार में जश्न
चुनाव में जीत के बाद अभिजीत वंजारी ने अपनी पत्नी स्मिता, बेटी देविका और भाई दिनेश वंजारी के साथ खुशी मनाई। जीत के इस अविस्मरणीय क्षण की तस्वीर में परिवार के सदस्य उत्साह और प्रसन्नता के साथ नजर आए।
नागपुर विभागीय पदवीधर चुनाव के परिणामों के साथ ही अवैध मतों की बड़ी संख्या भी चर्चा का विषय बन गई है। मतपत्र पर पसंदीदा उम्मीदवारों का क्रम सही तरीके से दर्ज करने के महत्व को इस चुनाव के आंकड़ों ने एक बार फिर सामने ला दिया है।

