एक साल में तुअर दाल 40 रुपये प्रति किलो तक महंगी, चावल और अन्य दालों के दाम भी बढ़े; त्योहार पर आम परिवारों का बजट बिगड़ा
नागपुर: दिवाली से पहले ही महंगाई ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। घरों में त्योहार की तैयारियों, मिठाइयों और फराल के सामान की खरीदारी के बीच दालों, चावल और अन्य जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आई है। सबसे ज्यादा असर तुअर दाल पर पड़ा है, जिसकी कीमत पिछले साल के मुकाबले 40 रुपये प्रति किलो तक बढ़कर 150 से 160 रुपये पहुंच गई है। वहीं, चना दाल के भाव भी 100 से 105 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
तुअर दाल और चना दाल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी
पिछले साल अक्टूबर में तुअर दाल 108 से 120 रुपये प्रति किलो बिक रही थी। इस साल अक्टूबर में इसकी कीमत बढ़कर 150 से 160 रुपये प्रति किलो हो गई है। इसी तरह चना दाल के भाव पिछले साल के 70 से 75 रुपये से बढ़कर 100 से 105 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
इन बढ़ती कीमतों का सीधा असर घरेलू रसोई के बजट पर पड़ रहा है। रोजाना इस्तेमाल होने वाली दालों की खरीदारी के लिए परिवारों को अब अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
चावल, मटकी और साबूदाना भी हुए महंगे
नागपुर के बाजार में चावल और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- श्रीराम चावल: पिछले साल 60 से 62 रुपये प्रति किलो के मुकाबले अब 80 से 85 रुपये प्रति किलो।
- बीपीटी चावल: पिछले साल 40 से 45 रुपये प्रति किलो के मुकाबले अब 65 से 70 रुपये प्रति किलो।
- साबूदाना: पिछले साल 62 से 66 रुपये प्रति किलो के मुकाबले अब 75 से 78 रुपये प्रति किलो।
- चना दाल: पिछले साल 70 से 75 रुपये प्रति किलो के मुकाबले अब 100 से 105 रुपये प्रति किलो।
- तुअर दाल: पिछले साल 108 से 120 रुपये प्रति किलो के मुकाबले अब 150 से 160 रुपये प्रति किलो।
इसके अलावा मटकी, मटर और मूंग जैसी दालों एवं कड़धान्यों के दाम भी बढ़ने से आम उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ गई है।
दिवाली के फराल की खरीदारी भी होगी महंगी
दिवाली पर घरों में चकली, चिवड़ा, लड्डू और अन्य फराल के पकवान बनाए जाते हैं। इनके लिए खाद्य तेल, चीनी, बेसन, रवा, मैदा और सूखे मेवों की जरूरत होती है। इन वस्तुओं की खरीदारी के साथ पूजा सामग्री, दीपक और नए कपड़ों का खर्च भी जुड़ जाता है।
ऐसे में जरूरी खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण त्योहार के लिए बचाकर रखी गई रकम का बड़ा हिस्सा रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च हो रहा है। परिवारों को त्योहार की खरीदारी में कटौती करने और खर्च का हिसाब लगाकर चलने की मजबूरी का सामना करना पड़ रहा है।
चावल के दाम और बढ़ने की आशंका
अनाज व्यापारी रमेश उमाटे के अनुसार, पिछले एक साल में अनाज और दालों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने आशंका जताई कि आगे भी कीमतें बढ़ सकती हैं। उनके मुताबिक, इस वर्ष धान की फसल कमजोर रहने से चावल के भाव में और तेजी आने की संभावना है। उन्होंने सरकार से महंगाई पर नियंत्रण के लिए समय रहते कदम उठाने की मांग की है।
आम परिवारों का बिगड़ रहा आर्थिक बजट
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि खाद्य पदार्थों, सब्जियों और खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू खर्च लगातार बढ़ रहा है। गृहिणी ज्योत्स्ना कडू के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में परिवार का मासिक खर्च काफी बढ़ गया है। वहीं, नागरिक शैलेंद्र दहीकर ने कहा कि जरूरी वस्तुओं के महंगे होने और अन्य खर्चों के बढ़ने से आम लोगों का बजट प्रभावित हो रहा है।
महंगाई के बीच दिवाली मनाना बनी चुनौती
दाल, चावल और अन्य जरूरी खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी से इस बार दिवाली का खर्च बढ़ने की आशंका है। सीमित आय में घर का खर्च, त्योहार की खरीदारी और अन्य जरूरतों के बीच संतुलन बनाना आम परिवारों के लिए चुनौती बन गया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में बाजार में कीमतों को लेकर कोई राहत मिलती है या महंगाई का दबाव और बढ़ता है।

