संतरे की खेती पर संकट के बीच किसान ने खोजा नया रास्ता! काटोल के 72 वर्षीय केशव गोतमारे ने 2 एकड़ में उगाया ‘जम्बो रेड ड्रैगन फ्रूट’

खुर्सापार के किसान ने लगाए 5,500 पौधे, पहले सीजन में मिला 4,000 किलो उत्पादन; अब मुंबई, नागपुर और बेंगलुरु के बाजारों तक फल पहुंचाने की तैयारी

खुर्सापार, तहसील काटोल: विदर्भ में सूखे की मार और संतरा-मौसंबी की फसलों में बड़े पैमाने पर फल गिरने से किसान परेशान हैं। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में खुर्सापार के 72 वर्षीय किसान केशव गोतमारे ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर एक नया विकल्प तलाशा है। उन्होंने अपनी दो एकड़ जमीन पर जम्बो रेड ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू कर किसानों के सामने कम पानी में फल उत्पादन की नई संभावना पेश की है।

कृषि में एमएससी की डिग्री प्राप्त कर चुके गोतमारे भारतीय स्टेट बैंक में सहायक महाप्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पुश्तैनी खेती को आगे बढ़ाने का फैसला किया और अब ड्रैगन फ्रूट की खेती के जरिए नई पहचान बना रहे हैं।

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दो एकड़ में लगाए 5,500 पौधे, जनवरी 2024 में शुरू की खेती

केशव गोतमारे ने 20 जनवरी 2024 को कोल्हापुर की एक नर्सरी से जम्बो रेड ड्रैगन फ्रूट के 5,500 पौधे लाकर अपने खेत में लगाए। उन्होंने प्राकृतिक तरीके से पौधों का पालन-पोषण किया।

करीब डेढ़ साल बाद, जुलाई 2025 में उन्हें पहली फसल प्राप्त हुई। जुलाई से नवंबर 2025 के बीच उन्होंने लगभग 4,000 किलोग्राम ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन हासिल किया। इससे उन्हें औसतन करीब 2.5 लाख रुपये की आय हुई।

पहले सीजन में उन्होंने स्थानीय बाजार में फल बेचे, जबकि उच्च गुणवत्ता वाले फलों को मुंबई के बाजार में भेजा।

कम पानी में खेती, लेकिन उचित देखभाल जरूरी

ड्रैगन फ्रूट की खेती कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए एक संभावित विकल्प मानी जाती है। इस फसल में ड्रिप सिंचाई के माध्यम से सीमित पानी का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, सफल उत्पादन के लिए खेत में उचित जल निकासी, पौधों को सहारा, नियमित देखभाल और रोगों से बचाव पर ध्यान देना जरूरी है।

जम्बो रेड किस्म के फलों का बाजार मूल्य उनके आकार, रंग और गुणवत्ता के आधार पर तय होता है। इसलिए केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि बेहतर गुणवत्ता बनाए रखना और बाजार की मांग के अनुसार बिक्री करना भी महत्वपूर्ण है।

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मुंबई के बाजार में बेहतर पैकेजिंग से 140 से 150 रुपये प्रति किलो तक भाव

पहले सीजन के अनुभव के बाद गोतमारे ने फलों की पैकेजिंग और विपणन पर विशेष ध्यान देने का फैसला किया। इसी उद्देश्य से उन्होंने ‘मातृ छाया कृषि फार्म’ की स्थापना की है।

गोतमारे के अनुसार, पिछले वर्ष जम्बो रेड ड्रैगन फ्रूट को सामान्य बिक्री में लगभग 50 से 55 रुपये प्रति किलोग्राम का भाव मिला था। वहीं, मुंबई के बाजार में उचित पैकेजिंग के साथ बेहतर गुणवत्ता वाले फलों को 140 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक कीमत मिलने की संभावना रही।

उनका लक्ष्य अब नागपुर, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े बाजारों तक अपनी उपज पहुंचाना है। हालांकि, वास्तविक मुनाफा उत्पादन लागत, पैकेजिंग, परिवहन और बाजार में मिलने वाले भाव पर निर्भर करेगा।

इस साल अब तक 4,500 किलो उत्पादन, 6,500 किलो का लक्ष्य

गोतमारे के अनुसार, जुलाई से अक्टूबर 2026 के बीच उन्हें लगभग 4,500 किलोग्राम ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन मिला है। नवंबर के अंत तक दो हजार किलोग्राम अतिरिक्त उत्पादन मिलने की उम्मीद है। इस तरह मौजूदा सीजन में उनका कुल उत्पादन लगभग 6,500 किलोग्राम तक पहुंच सकता है।

यदि उत्पादन का लक्ष्य पूरा होता है, तो यह उनकी खेती के विस्तार और विपणन योजना के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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निर्यात की तैयारी, फलों की गुणवत्ता की होगी जांच

गोतमारे अब अपनी उपज को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में भी प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए वे फलों को आवश्यक गुणवत्ता परीक्षण और निर्यात संबंधी प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया के तहत जांच के लिए नागपुर स्थित एनाकॉन लेबोरेटरी भेजने की तैयारी कर रहे हैं।

उन्होंने इजरायली कृषि पद्धतियों से प्रेरित होकर खेती करने और विदर्भ के किसानों के सामने एक वैकल्पिक मॉडल प्रस्तुत करने की इच्छा जताई है।

संतरा उत्पादक क्षेत्र में वैकल्पिक खेती की बढ़ती जरूरत

काटोल और नरखेड़ क्षेत्र में संतरा उत्पादक किसानों को मौसम और पानी की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में ड्रैगन फ्रूट जैसी वैकल्पिक फसलों की संभावनाओं पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।

हालांकि, किसी भी नई फसल को बड़े पैमाने पर अपनाने से पहले स्थानीय जलवायु, मिट्टी, शुरुआती निवेश, सिंचाई व्यवस्था और बाजार की उपलब्धता का आकलन जरूरी है। केशव गोतमारे का प्रयोग यह दिखाता है कि सही तकनीक, फसल प्रबंधन और बाजार नियोजन के साथ किसान पारंपरिक खेती के विकल्प तलाश सकते हैं।

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