चंद्रपुर: जिले के घुग्घुस में जमीन और सार्वजनिक सड़क को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। Lloyds Metals and Energy Ltd पर शांतिनगर के निवासियों की करीब 7 करोड़ रुपये कीमत की जमीन पर कथित अतिक्रमण करने और निजी अस्पताल के निर्माण के लिए सार्वजनिक सड़क को बंद करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले ने जमीन के मालिकाना हक, सार्वजनिक रास्ते और नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस संबंध में भाजपा की गुटनेता मीना चांद मोरपका ने घुग्घुस नगर परिषद के मुख्याधिकारी को लिखित शिकायत देकर कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, सार्वजनिक सड़क को दोबारा शुरू करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
1996 के समझौते से जुड़ा है जमीन का विवाद
मीना चांद मोरपका के अनुसार, 14 मई 1996 को Lloyds Metals और शांतिनगर के निवासियों के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत कंपनी को 1.38 हेक्टेयर जमीन खरीदकर परियोजना प्रभावित परिवारों में वितरित करनी थी।
इसके बाद कंपनी ने 62 भूखंडों वाले लेआउट को मंजूरी दिलाई थी। हालांकि, लगभग 2,600 वर्ग मीटर (27,975 वर्ग फीट) जमीन को भविष्य के विकास के लिए आरक्षित रखा गया था।
मोरपका का आरोप है कि शांतिनगर के निवासियों के हितों के लिए निर्धारित इस आरक्षित जमीन का अब निजी अस्पताल निर्माण के लिए उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने जमीन के वर्तमान उपयोग और उसके पीछे अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
सार्वजनिक सड़क पर सुरक्षा दीवार बनाकर रास्ता बंद करने का आरोप
इस विवाद का सबसे गंभीर पहलू चंद्रपुर रोड को शांतिनगर से जोड़ने वाली सार्वजनिक सड़क है, जो कथित तौर पर विवादित जमीन से होकर गुजरती थी।
शिकायत के अनुसार, तत्कालीन ग्राम पंचायत ने वर्ष 2019 में प्रस्ताव पारित कर इस सड़क के कंक्रीटीकरण को मंजूरी दी थी। बाद में प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) के तहत इस सड़क का निर्माण किया गया था।
अब आरोप लगाया गया है कि Lloyds Metals ने निजी अस्पताल का निर्माण करने के लिए सार्वजनिक सड़क पर सुरक्षा दीवार खड़ी कर दी और सड़क के एक हिस्से को तोड़ दिया।
यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो सार्वजनिक निधि से तैयार की गई सड़क को बंद करने और नागरिकों की आवाजाही रोकने की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
नगर परिषद के प्रस्ताव क्रमांक 14 पर भी सवाल
मीना चांद मोरपका ने घुग्घुस नगर परिषद के 29 अप्रैल 2026 के प्रस्ताव क्रमांक 14 की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई है। यह प्रस्ताव सार्वजनिक सड़क को बंद करने से संबंधित था।
मोरपका का कहना है कि नियमानुसार सड़क बंद करने से पहले नागरिकों से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करने के लिए 30 दिनों का समय देना आवश्यक था। लेकिन आरोप है कि इस अनिवार्य प्रक्रिया का पालन किए बिना प्रस्ताव पारित किया गया।
इसके बाद 30 अप्रैल 2026 को सार्वजनिक नोटिस जारी किया गया, जिसके बाद अमित बोरकर और एक अन्य निवासी ने सड़क बंद करने के विरोध में लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं।
29 जून के प्रस्ताव के बाद भी अंतिम निर्णय लंबित
विवाद बढ़ने के बाद नगर परिषद ने 29 जून 2026 को प्रस्ताव क्रमांक 19 पारित किया। इसमें जनप्रतिनिधियों, शांतिनगर के निवासियों और कंपनी के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया था।
इसके बाद विशेष आमसभा में अंतिम निर्णय लेने की बात कही गई थी।
हालांकि, मोरपका के अनुसार, इस प्रक्रिया के तहत अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब नागरिकों की आपत्तियां लंबित थीं और सड़क बंद करने पर अंतिम फैसला नहीं हुआ था, तो विवादित जमीन पर निर्माण कार्य कैसे आगे बढ़ा?
मीना मोरपका की तीन प्रमुख मांगें
भाजपा गुटनेता मीना चांद मोरपका ने अपनी शिकायत में प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं।
- Lloyds Metals के खिलाफ जांच: कथित अतिक्रमण और जमीन के उपयोग की विस्तृत जांच कर कंपनी के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
- सार्वजनिक सड़क बहाल की जाए: शांतिनगर की सार्वजनिक सड़क को पहले की स्थिति में बहाल किया जाए और सड़क तोड़ने तथा रास्ता बंद करने की जांच हो।
- आरक्षित जमीन का मूल स्वरूप बहाल हो: भविष्य के विकास के लिए आरक्षित जमीन की स्थिति की जांच कर अस्पताल निर्माण के लिए उसके उपयोग की वैधता की पुष्टि की जाए।
इसके अलावा, उन्होंने नगर परिषद प्रशासन की भूमिका और लिए गए फैसलों की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की है।
Lloyds Metals ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
दूसरी ओर, Lloyds Metals and Energy Ltd ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत और बेबुनियाद बताया है।
कंपनी के प्रतिनिधि प्रशांत पुरी ने कहा कि विवादित जमीन कंपनी के स्वामित्व में है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित 7/12 भूमि अभिलेखों की जांच करने पर जमीन के मालिकाना हक की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
कंपनी का कहना है कि आधिकारिक राजस्व रिकॉर्ड देखे बिना उस पर जमीन कब्जाने के आरोप लगाना उचित नहीं है।
हालांकि, कंपनी की ओर से मालिकाना हक को लेकर दिए गए स्पष्टीकरण के बावजूद 1996 के समझौते, सार्वजनिक सड़क की स्थिति, आरक्षित जमीन के उपयोग और सड़क बंद करने की नगर परिषद की प्रक्रिया से जुड़े सवाल अभी भी बने हुए हैं।
शांतिनगर के निवासियों को प्रशासन के फैसले का इंतजार
घुग्घुस का यह विवाद अब केवल जमीन के मालिकाना हक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें सार्वजनिक सुविधाओं, नागरिकों के अधिकारों और नगर परिषद की जवाबदेही का मुद्दा भी जुड़ गया है।
एक ओर Lloyds Metals जमीन पर अपना मालिकाना हक होने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर मीना चांद मोरपका ने जमीन के उपयोग और सार्वजनिक सड़क बंद किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
अब सभी की नजरें नगर परिषद प्रशासन के अगले कदम, लंबित आपत्तियों और अस्पताल निर्माण की वैधता को लेकर होने वाली जांच पर टिकी हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नागरिकों की सुविधा के लिए सरकारी योजना के तहत बनाई गई सार्वजनिक सड़क को बंद किया जा सकता है? और क्या परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए आरक्षित बताई गई जमीन का उपयोग सभी आपत्तियों का निपटारा किए बिना निजी परियोजना के लिए किया जा सकता है?

