देखभाल में लापरवाही और बचाव कार्य में देरी का आरोप; 52 से 60 से अधिक नागरिक हुए थे प्रभावित, कई मरीज ICU में भर्ती
नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर स्थित गोधनी में महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (एमजेपी) के जलशुद्धीकरण केंद्र में हुए क्लोरीन गैस रिसाव मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। जलशुद्धीकरण केंद्र और क्लोरीन सिलिंडर के रखरखाव में कथित लापरवाही के आरोप में ठेकेदार मोहन आनंद और क्लोरीन गैस सिलिंडर आपूर्तिकर्ता राजकुमार तातेड के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
जिलाधिकारी डॉ. कुमार आशीर्वाद द्वारा गठित उच्चस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट में जलशुद्धीकरण केंद्र और सिलिंडर के रखरखाव में लापरवाही के साथ ही गैस रिसाव के बाद बचाव कार्य में देरी की बात सामने आई है। समिति की सिफारिश के बाद एमजेपी के उपअभियंता श्रीकांत बत्तुलवार की शिकायत पर मानकापुर पुलिस ने यह कार्रवाई की।
जांच समिति की रिपोर्ट में क्या सामने आया?
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. कुमार आशीर्वाद ने मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में ठेकेदार मोहन आनंद और क्लोरीन सिलिंडर आपूर्तिकर्ता राजकुमार तातेड की ओर से उचित रखरखाव नहीं किए जाने की बात दर्ज की।
पुलिस के अनुसार, गैस रिसाव शुरू होने के बाद भी बचाव कार्य में गंभीर लापरवाही हुई। इसके अलावा, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक उपाय तत्काल नहीं किए गए। जांच रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
आधी रात को हुआ जहरीली क्लोरीन गैस का रिसाव
यह घटना 23 और 24 अगस्त की मध्यरात्रि की है। रात करीब 12:30 से 12:45 बजे के बीच गोधनी स्थित जलशुद्धीकरण केंद्र में लगे टनर क्लोरीन सिलिंडर से अचानक बड़ी मात्रा में जहरीली गैस का रिसाव शुरू हो गया।
कुछ ही समय में आसपास के क्षेत्र में गैस की तेज गंध फैल गई। उस समय गहरी नींद में सो रहे नागरिकों को सांस लेने में परेशानी होने लगी, जबकि छोटे बच्चों को उल्टियां होने की शिकायतें सामने आईं। जहरीली गैस के फैलने से इलाके में दहशत का माहौल बन गया और कई लोगों को अपनी जान बचाने के लिए आधी रात को घरों से बाहर निकलना पड़ा।
52 से 60 से अधिक नागरिक हुए प्रभावित, कई ICU में भर्ती
क्लोरीन गैस के संपर्क में आने से 52 से 60 से अधिक नागरिक प्रभावित हुए थे। इनमें कुछ लोगों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें अस्पताल के अतिदक्षता विभाग (ICU) में भर्ती कराना पड़ा था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 15 से 20 लोगों की स्थिति चिंताजनक बताई गई थी।
इस घटना ने जलशुद्धीकरण केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था और जहरीली गैस के भंडारण तथा रखरखाव से जुड़े इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
पुलिस ने 200 मीटर का क्षेत्र कराया खाली
गैस रिसाव की सूचना मिलते ही मानकापुर पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक हरीश कळसेकर अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने प्रभावित नागरिकों को तत्काल अपने वाहनों से अस्पताल पहुंचाने में मदद की।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जलशुद्धीकरण केंद्र के आसपास के 200 मीटर क्षेत्र को खाली कराकर प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया। इसके साथ ही, रिसाव के प्रभाव को कम करने के लिए कॉस्टिक सोडा का छिड़काव किया गया।
NDRF, अग्निशमन विभाग और OCW ने संभाला मोर्चा
गैस रिसाव पर काबू पाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), अग्निशमन विभाग और ऑरेंज सिटी वाटर (OCW) की टीमों ने कई घंटों तक प्रयास किए। राहत एवं बचाव दलों ने क्षेत्र को सुरक्षित करने और गैस के प्रभाव को कम करने के लिए लगातार काम किया।
काफी मशक्कत के बाद अगले दिन सुबह करीब 9 बजे गैस रिसाव पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सका।
लापरवाही के आरोपों की जांच के बाद पुलिस कार्रवाई
गोधनी गैस रिसाव मामले में जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ठेकेदार मोहन आनंद और सिलिंडर आपूर्तिकर्ता राजकुमार तातेड के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। जांच में रखरखाव की कथित अनदेखी और रिसाव के बाद समय पर आवश्यक कदम नहीं उठाए जाने की बात सामने आई है।
यह मामला औद्योगिक एवं सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है। अब पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच में आरोपों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।

