नागपुर: नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा की हार अब केवल चुनावी नतीजों तक सीमित नहीं रह गई है। इस हार के बाद पार्टी के भीतर उम्मीदवार चयन, आंतरिक नाराजगी और चुनावी प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस पूरे विवाद के केंद्र में पूर्व विधान परिषद सदस्य अनिल सोले का नाम सामने आ रहा है, जिन्हें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का करीबी माना जाता है।
कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करते हुए भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार सुधाकर कोहळे को 3,271 वोटों से पराजित किया। नागपुर भाजपा का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता है। यह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र भी है। ऐसे में भाजपा के लिए यह हार राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अनिल सोले को टिकट नहीं मिलने से शुरू हुई नाराजगी
इस चुनाव में भाजपा द्वारा पूर्व विधान परिषद सदस्य अनिल सोले को टिकट नहीं देना चर्चा का प्रमुख विषय रहा। सोले को टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया था।
इस घटनाक्रम से भाजपा के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर असंतोष सामने आया। हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने व्यक्तिगत रूप से अनिल सोले के घर पहुंचकर उनसे मुलाकात की और विवाद सुलझाने का प्रयास किया। इसके बाद सोले ने अपना प्रचार अभियान रोक दिया था।
राजनीतिक हलकों में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस पूरे घटनाक्रम का असर भाजपा के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ा? हालांकि, अनिल सोले की निर्दलीय उम्मीदवारी से सुधाकर कोहळे को कितना नुकसान हुआ, इसका स्पष्ट आकलन अभी सामने नहीं आया है।
15 हजार से अधिक अवैध वोट बने चुनाव का बड़ा मुद्दा
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में 15 हजार से अधिक मत अवैध घोषित किए जाने का मामला भी चर्चा में है।
रिपोर्ट के अनुसार, इनमें करीब 9 हजार मतपत्रों पर सुधाकर कोहळे को दूसरी पसंद का उम्मीदवार दर्शाया गया था, लेकिन शेष 37 उम्मीदवारों के लिए आगे की प्राथमिकताएं दर्ज नहीं की गई थीं।
इस मतदान पद्धति को लेकर मतदाताओं की जागरूकता और प्राथमिकता आधारित मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, केवल मतदान के इस पैटर्न के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी मतदाताओं ने जानबूझकर ऐसा किया था या इसके पीछे कोई विशेष राजनीतिक कारण था।
सुधाकर कोहळे अवैध मतों के खिलाफ करेंगे अपील
भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहळे ने अवैध घोषित किए गए मतों को लेकर अपील करने के संकेत दिए हैं। उनके इस कदम से मतगणना प्रक्रिया और बड़ी संख्या में मतों के अमान्य होने के कारणों की जांच की मांग तेज हो सकती है।
इस मामले में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अपील में किन आधारों पर सवाल उठाए जाते हैं और संबंधित चुनावी प्राधिकरण इस पर क्या निर्णय लेता है।
नितिन गडकरी का नागपुर से रहा है पुराना राजनीतिक संबंध
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र भाजपा के लिए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने वर्ष 1990 से 2014 तक इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था।
ऐसे में भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार की लगातार दूसरी बार हार ने पार्टी के सामने अपने पारंपरिक मतदाता वर्ग के बीच समर्थन बनाए रखने की चुनौती खड़ी कर दी है।
चंद्रशेखर बावनकुले ने स्वीकार की हार की जिम्मेदारी
भाजपा के चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी संभाल रहे चंद्रशेखर बावनकुले ने हार की जिम्मेदारी स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस हार से सबक लेते हुए सुधारात्मक कदम उठाएगी और अगले चुनाव में नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र दोबारा जीतने के लिए काम करेगी।
बावनकुले के बयान से यह भी संकेत मिला कि पार्टी चुनावी हार के कारणों की समीक्षा करेगी। उन्होंने चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने की बात भी कही।
पुणे और संभाजीनगर में भी महायुति के भीतर मतभेद
भाजपा की परेशानी केवल नागपुर तक सीमित नहीं रही। महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के चुनाव में महायुति को केवल दो सीटें मिलीं। भाजपा तीन सीटों पर चुनाव मैदान में उतरी थी, लेकिन उसे केवल पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जीत मिली, जहां कौस्तुभ गावडे ने शिवसेना के बागी उम्मीदवार सचिन सनप को हराया।
पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा की उम्मीदवार स्मिता जाधव की हार के बाद भी गठबंधन के भीतर आरोप-प्रत्यारोप सामने आए। भाजपा के एक पदाधिकारी ने आरोप लगाया कि शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने स्मिता जाधव के खिलाफ प्रचार किया था।
भाजपा का कहना है कि यदि महायुति के तीनों सहयोगी दलों ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा होता, तो गठबंधन सभी पांच सीटें जीत सकता था।
शिवसेना ने भाजपा को ही दी आत्ममंथन की सलाह
भाजपा के आरोपों पर शिवसेना ने भी पलटवार किया। पुणे शिवसेना प्रमुख रवींद्र धंगेकर ने कहा कि भाजपा को अपने सहयोगी दलों को हल्के में लेना बंद करना चाहिए।
उन्होंने चुनाव परिणाम को भाजपा के लिए आत्ममंथन का अवसर बताया। इस बयान के बाद महायुति के भीतर सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर मतभेद और खुलकर सामने आए।
अब्दुल सत्तार ने शरद पवार गुट के उम्मीदवार को दिया समर्थन
छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी महायुति के भीतर असहमति देखने को मिली। यहां NCP (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवार प्रतापसिंह पाटील ने अजित पवार गुट के उम्मीदवार सतीश चव्हाण को हराया।
शिवसेना के वरिष्ठ नेता और मंत्री अब्दुल सत्तार ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि उन्होंने अपने गठबंधन सहयोगी NCP के उम्मीदवार के बजाय शरद पवार गुट के उम्मीदवार का समर्थन किया था। उन्होंने इसके पीछे NCP द्वारा उम्मीदवार चयन को गलत बताया।
वहीं, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी पांचों निर्वाचन क्षेत्रों में एक भी सीट नहीं जीत सकी। पार्टी प्रमुख सुनेत्रा पवार ने चुनाव परिणामों को सीख लेने का अवसर बताया।
नागपुर की हार ने भाजपा के सामने खड़े किए कई सवाल
इस पूरे चुनावी घटनाक्रम ने भाजपा के सामने कई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। एक तरफ अनिल सोले को टिकट नहीं मिलने से पैदा हुई नाराजगी चर्चा में है, तो दूसरी तरफ 15 हजार से अधिक अवैध मतों और गठबंधन सहयोगियों के बीच आपसी मतभेदों ने चुनावी नतीजों को और विवादास्पद बना दिया है।
नागपुर जैसे भाजपा के मजबूत राजनीतिक क्षेत्र में सुधाकर कोहळे की 3,271 वोटों से हार के बाद अब पार्टी के उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक रणनीति की समीक्षा की मांग उठ रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा अनिल सोले की नाराजगी और अपने संगठन के भीतर उठ रहे असंतोष का समय रहते आकलन नहीं कर पाई? फिलहाल इस हार के वास्तविक कारणों और अवैध मतों के विवाद पर आगे होने वाली समीक्षा पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।

