वाइस चांसलर ने माना, विश्वविद्यालय से हुई गलती
नागपुर :
राष्ट्रीय संत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय द्वारा संचालित शीत सत्र परीक्षाओं के दौरान एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। बिना प्रवेश पत्र के ही कुछ छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई, जबकि नियमानुसार परीक्षा से कम से कम 15 दिन पहले प्रवेश पत्र उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है। इस घटना को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की कड़ी आलोचना की जा रही है।
इस संबंध में कुलपति डॉ. मानली क्षीरसागर ने सफाई देते हुए स्वीकार किया कि प्रवेश पत्र जारी करने में तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से चूक हुई। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की गलतियां दोहराई न जाएं, इसके लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
छात्रावासों का नवीनीकरण और मरम्मत कार्य जारी
कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय के छात्रावासों की जर्जर स्थिति को देखते हुए उनके नवीनीकरण और मरम्मत का कार्य शुरू किया गया है। छात्रावासों में प्लास्टर गिरने, दीवारों में दरारें आने जैसी समस्याएं सामने आई थीं, जिसके चलते नए प्लास्टर और मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य पर लगभग 5 से 5.5 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। नवीनीकरण का काम चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है, ताकि छात्रों को असुविधा न हो।
डॉ. क्षीरसागर ने बताया कि विश्वविद्यालय में स्वीकृत पदों की तुलना में कर्मचारी संख्या काफी कम है। वर्तमान में केवल 86 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि कुल 282 पद स्वीकृत हैं। जुलाई तक 172 पद रिक्त थे, जिससे प्रशासनिक कार्यों पर दबाव बढ़ा है। रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा।

