नागपुर: जिला न्यायालय परिसर में पार्किंग व्यवस्था को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया। पार्किंग बंद किए जाने से नाराज वकीलों ने सोमवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और प्रवेश द्वार पर लगाए गए पुलिस बैरिकेड को उखाड़कर फेंक दिया। इस घटना से कुछ समय के लिए न्यायालय परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
जानकारी के अनुसार, प्रधान जिला न्यायाधीश (पीडीजे) के आदेश पर नई सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई, जिसके तहत न्यायालय परिसर में सभी वाहनों की पार्किंग पर रोक लगा दी गई। सोमवार को प्रवेश द्वार पर बैरिकेड लगाकर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई, जिससे वकीलों में भारी नाराजगी फैल गई और उन्होंने मौके पर विरोध शुरू कर दिया।
वकीलों का कहना था कि वर्षों से चली आ रही पार्किंग व्यवस्था को बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के अचानक बदल दिया गया है। उनका आरोप है कि न्यायाधीशों के वाहनों के लिए तो स्थान उपलब्ध कराया गया है, लेकिन वकीलों, कर्मचारियों और पक्षकारों को रोका जा रहा है। बाहर पुलिस कार्रवाई कर रही है और ओल्ड हाई कोर्ट बिल्डिंग में पहले से ही पार्किंग की पर्याप्त सुविधा नहीं है।
इस मुद्दे को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता आसिफ कुरैशी, प्रकाश जायसवाल, आशीष पांडे, वासुदेव कापसे, चंद्रशेखर ढाक, अमित बंडु और नितेश रमटे सहित बड़ी संख्या में वकील पीडीजे के कक्ष में पहुंचे और अपना पक्ष रखा। काफी देर तक तीखी बहस होती रही। पीडीजे ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।
बताया गया है कि कुछ दिन पहले न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी भरा ईमेल प्राप्त हुआ था, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को गंभीरता से लेते हुए परिसर में किसी भी वाहन को प्रवेश नहीं देने का निर्णय लिया गया। हालांकि, हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कुछ दिनों के लिए व्यवस्था पूर्ववत किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
सोमवार को विरोध के दौरान वकीलों ने प्रवेश द्वार पर लगाए गए बैरिकेड को उखाड़कर फेंक दिया, जिसके बाद स्थिति और बिगड़ गई। बाद में प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप से हालात पर काबू पाया गया और कुछ शिथिलता लाई गई।
फिलहाल जिला न्यायालय परिसर में पार्किंग व्यवस्था को लेकर असमंजस बना हुआ है और वकीलों ने प्रशासन से इस संबंध में स्थायी व व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की है।

