विदर्भ : कहीं खुशी, कहीं गम का माहौल

नागपुर: महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव 2025 के नतीजों में विदर्भ की सियासी तस्वीर साफ तौर पर सामने आ गई है। नागपुर और गढ़चिरौली जिले को छोड़ दिया जाए तो अकोला, बुलढाणा, अमरावती, वर्धा, यवतमाल, वाशिम, चंद्रपुर और भंडारा जिलों में मिले-जुले परिणाम देखने को मिले। कहीं भाजपा और महायुति के कार्यकर्ता जीत का जश्न मनाते दिखे, तो कहीं कांग्रेस और अन्य दलों के लिए निराशा का माहौल रहा।

नागपुर जिले में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 27 में से 22 सीटों पर नगराध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की। वहीं भंडारा में भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों ने बढ़त बनाई। गढ़चिरौली जिले में भी भाजपा को स्पष्ट सफलता मिली, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मेहनत और रणनीति का असर इन जिलों में साफ नजर आया।

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इसके विपरीत अमरावती, वर्धा, यवतमाल और वाशिम जैसे जिलों में मुकाबला कड़ा रहा। अमरावती जिले के चिखलदरा में कांग्रेस को जीत मिली, जबकि कुछ स्थानों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। चंद्रपुर जिले में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया, वहीं भाजपा को सीमित सफलता मिली। वर्धा जिले के देवली में कई वर्षों बाद अन्य दलों ने भाजपा को चुनौती दी।

अकोला जिले में पहली बार हुए नगर परिषद चुनाव में भाजपा को सत्ता मिली, लेकिन विधानसभा क्षेत्र में पार्टी को झटका लगा। बुलढाणा जिले में शिवसेना (शिंदे गुट) ने प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई और कुछ स्थानों पर भाजपा के साथ गठबंधन का असर दिखा। वाशिम और यवतमाल में परिणाम बंटे हुए रहे, जहां कांग्रेस, भाजपा और शिवसेना को अलग-अलग क्षेत्रों में समर्थन मिला।

कुल मिलाकर विदर्भ में यह चुनाव कहीं खुशी तो कहीं गम का कारण बना। भाजपा ने जहां नागपुर और गढ़चिरौली में अपनी पकड़ मजबूत की, वहीं अन्य जिलों में उसे कड़ी टक्कर और कुछ स्थानों पर हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों ने आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए राजनीतिक दलों को नई रणनीति बनाने का संकेत दे दिया है।

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