महाराष्ट्र में लोकल बॉडी चुनावों के पहले चरण के लिए मतदान पूरा हो चुका है, लेकिन मतगणना और परिणामों की घोषणा फिलहाल स्थगित कर दी गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पहले चरण के परिणामों की घोषणा पर रोक लगा दी है। अदालत का कहना है कि 264 स्थानीय निकायों के नतीजे 3 दिसंबर को जारी किए जाने पर 20 दिसंबर को होने वाले दूसरे चरण के मतदान पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
न्यायमूर्ति अनिल एस. किलोर और न्यायमूर्ति राजनिश आर. व्यास की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि चरणबद्ध तरीके से मतगणना और परिणाम घोषित करने से दूसरे चरण के वोटरों का मनोविज्ञान प्रभावित हो सकता है और इससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा होगा। अदालत ने माना कि पहले चरण के नतीजे समय से पहले जारी करने से दूसरे चरण में वोटिंग पैटर्न और रणनीति बदल सकती है, जिससे अंतिम परिणामों पर “भौतिक प्रभाव” पड़ने की आशंका है।
इस मामले में कम से कम 10 याचिकाएँ दायर की गई थीं। इनमें मांग की गई थी कि 2 दिसंबर को हुए पहले चरण के मतदान के परिणाम 21 दिसंबर को ही घोषित किए जाएँ, ताकि यह दूसरे चरण के मतदान को प्रभावित न करे। अदालत ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए SEC को निर्देश दिया कि दोनों चरणों के चुनावों के परिणाम एक साथ 21 दिसंबर को घोषित किए जाएँ।
राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने पहले चरण के परिणामों के लिए 3 दिसंबर की तारीख तय की थी, जबकि जिन निकायों में अपीलें लंबित थीं, उनकी मतगणना 21 दिसंबर को प्रस्तावित थी। SEC ने अदालत में यह भी कहा था कि मतदान दो चरणों में किए जाने के कारण कार्यक्रम में बदलाव आवश्यक था। हालांकि, अदालत ने आयोग की योजना को खारिज करते हुए साफ कहा कि परिणामों की अग्रिम घोषणा दूसरे चरण के मतदाताओं को प्रभावित कर सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि यदि पहले चरण के परिणाम पहले घोषित होते हैं, तो उम्मीदवार और राजनीतिक दल अपनी रणनीति बदल सकते हैं। यह मतदाताओं के निर्णयों को प्रभावित कर सकता है, जो निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया के विरुद्ध है।
हाईकोर्ट का यह आदेश लागू होने के बाद अब दोनों चरणों के परिणाम एक साथ 21 दिसंबर को घोषित किए जाएँगे। इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी भी चरण पर दूसरे के परिणामों का प्रभाव नहीं पड़ेगा।
अब राज्य की सभी निगाहें 21 दिसंबर पर टिकी हैं, जब दोनों चरणों के लोकल बॉडी चुनावों के परिणाम एक साथ सामने आएंगे और यह तय होगा कि स्थानीय निकायों में सत्ता का समीकरण किस दिशा में झुका है।

