महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर! क्या दोनों NCP फिर होंगी एक? भाजपा खेमे में बढ़ी टेंशन

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। महायुती गठबंधन में दरार की चर्चा के बीच अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोबारा एक हो जाने की संभावना ज़ोर पकड़ रही है।दरअसल, हाल ही में कोल्हापुर जिले में स्थित चंदगड नगर परिषद के चुनावों के दौरान दोनों ही एनसीपी के नेताओं ने एक साथ आकर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत दिखाई देने लगे हैं।

लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान दोनों पक्ष अलग-अलग रास्ते पर थे और एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़े थे। लेकिन अब चंदगड नगरपरिषद और कोल्हापुर जिला परिषद चुनाव में दोनों गुटों के एक साथ आने की घोषणा की गई। यह घोषणा मंत्री हसन मुश्रीफ ने की।

इसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह केवल स्थानीय स्तर का राजनीतिक गणित है या फिर दोनों पवार गुटों के बीच बड़े पैमाने पर मेल-मिलाप की तैयारी हो रही है।

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इसी बीच अजित पवार और शरद पवार की मुलाकातों में भी पिछले कुछ दिनों में बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे राजनीतिक अटकलों को और हवा मिल गई है। कुछ समय पहले अजित पवार ने सार्वजनिक मंच पर कहा था कि “शरद पवार मेरे राजनीतिक गुरु हैं और हमेशा रहेंगे।”

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बीड़, कोल्हापुर और पश्चिम महाराष्ट्र के कई तालुका क्षेत्रों में भी दोनों NCP गुटों के स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच नज़दीकियाँ बढ़ रही हैं।

अगर दोनों NCP गुट एकजुट होते हैं, तो यह भाजपा और महायुती सरकार के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। महाराष्ट्र की सत्ता और चुनावी रणनीति में इससे भारी बदलाव देखने को मिल सकता है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह एकता सिर्फ स्थानीय राजनीतिक लाभ तक सीमित रहती है, या फिर आने वाले महीनों में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी दोनों NCP गुट एक मंच पर दिखाई देंगे

महाराष्ट्र की राजनीति लगातार करवट बदल रही है। सत्ता की गलियों में हर कदम पर हिसाब बदल रहा है। आने वाले चुनावों से पहले यह समीकरण क्या नया रूप लेता है, इस पर हर किसी की नजर टिकी हुई है।

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