नागपुर: नागपुर पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव परिणाम ने राजनीतिक समीकरणों के साथ-साथ सट्टा बाजार के अनुमानों को भी उलटकर रख दिया है। भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले की जीत पर बड़ी रकम लगाने वाले कई सटोरियों को कथित तौर पर भारी नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं, कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी और कराले मास्टर के नाम पर दांव लगाने वाले कुछ लोगों को फायदा होने की चर्चा है।
सूत्रों के मुताबिक, नागपुर के सट्टा बाजार में इस चुनाव को लेकर करीब 95 से 100 करोड़ रुपये तक के दांव लगाए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस कथित कारोबार और सटोरियों के वास्तविक मुनाफे या नुकसान की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नागपुर में 500 से अधिक सटोरियों के सक्रिय होने का दावा
सूत्रों के अनुसार, नागपुर में छोटे-बड़े मिलाकर 500 से अधिक सटोरियों के सक्रिय होने की चर्चा है। यहां क्रिकेट मैचों से लेकर लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद चुनावों तक के नतीजों पर कथित तौर पर दांव लगाए जाते हैं।
नागपुर पदवीधर निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में भी शुरुआत से ही संभावित जीत और हार को लेकर सट्टा बाजार में चर्चाएं चल रही थीं।
17 अक्टूबर के बाद सुधाकर कोहले पर बढ़ा भरोसा
शुरुआती दौर में सट्टा बाजार के अनुमान कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी के पक्ष में बताए जा रहे थे। लेकिन 17 अक्टूबर के बाद भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले को लेकर सटोरियों का रुझान बढ़ने की बात सामने आई।
सट्टा बाजार में बताए गए भाव के अनुसार:
- 23 अक्टूबर: सुधाकर कोहले का भाव 60 पैसे और अभिजीत वंजारी का 80 पैसे बताया गया।
- 25 अक्टूबर: कोहले का भाव घटकर 55 पैसे और वंजारी का भाव 60 पैसे तक पहुंचने की चर्चा रही।
इन बदलते भावों के आधार पर कई लोगों ने कोहले की जीत की संभावना अधिक मानकर उनके पक्ष में दांव लगाए।
मतगणना के दिन बदला सट्टा बाजार का रुख
बताया जाता है कि 27 अक्टूबर की आधी रात से कुछ सटोरियों ने दांव स्वीकार करना बंद कर दिया था। वहीं, 28 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर अभिजीत वंजारी के पक्ष में दांव लगाए जाने की चर्चा शुरू हुई।
जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी और चुनावी नतीजों का रुख बदला, वैसे-वैसे पहले लगाए गए दांव का गणित भी बिगड़ने लगा। शुरुआती अनुमानों के आधार पर सुधाकर कोहले की जीत पर रकम लगाने वालों को कथित तौर पर आर्थिक नुकसान हुआ।
कराले मास्टर के नाम पर दांव लगाने वालों को फायदा?
इस चुनाव में कराले मास्टर यानी नितेश कराले को लेकर सट्टा बाजार का गणित कुछ अलग बताया जा रहा है। शुरुआत में सट्टा बाजार में उनके नाम को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया और अपेक्षाकृत कम लोगों ने उनके पक्ष में दांव लगाए।
हालांकि, मतगणना के दौरान कुछ चरणों में उनके पक्ष में 70 पैसे से अधिक का भाव दिए जाने की चर्चा सामने आई। बताया जा रहा है कि इस दौरान उनके नाम पर दांव लगाने वाले कुछ लोगों को फायदा हुआ।
100 करोड़ के कथित सट्टे की चर्चा, आधिकारिक पुष्टि नहीं
नागपुर पदवीधर चुनाव के नतीजों ने चुनाव से पहले लगाए गए अनुमानों और सट्टा बाजार के गणित के बीच अंतर उजागर कर दिया है। करीब 95 से 100 करोड़ रुपये के कथित सट्टे और सटोरियों के मुनाफे-नुकसान को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
हालांकि, इतनी बड़ी रकम के लेन-देन, वास्तविक कारोबार और सटोरियों को हुए नुकसान या फायदे की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन आंकड़ों को फिलहाल सूत्रों के दावों और अपुष्ट जानकारी के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

