नागपुर एयरपोर्ट के विकास का GMR का प्लान कागजों तक सीमित, काम की रफ्तार बेहद धीमी

साढ़े तीन महीने बाद भी विकास कार्यों में ठोस प्रगति नहीं

नागपुर: डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय विमानतल का संचालन जीएमआर समूह को सौंपे हुए साढ़े तीन महीने से अधिक समय हो चुका है। 25 जून 2026 को आधिकारिक हस्तांतरण के बाद उम्मीद थी कि नागपुर के हवाई क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। हालांकि, बड़े-बड़े दावों और आकर्षक विकास योजनाओं की तुलना में जमीनी स्तर पर काम की रफ्तार बेहद धीमी दिखाई दे रही है।

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1,300 करोड़ रुपये के निवेश का पहला चरण 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य

जीएमआर एयरपोर्ट्स ने जुलाई 2026 में नागपुर विमानतल के लिए नया और संशोधित बहु-चरणीय मास्टर प्लान जारी किया था। इसके तहत पहले चरण में 1,300 करोड़ रुपये का निवेश कर वर्ष 2027 के अंत तक विमानतल का स्वरूप बदलने की योजना है। लेकिन मौजूदा प्रगति को देखते हुए इतने कम समय में इतनी बड़ी परियोजनाएं पूरी होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

300 करोड़ रुपये के तत्काल कार्य अभी योजना और निविदा स्तर पर

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जुलाई 2026 में घोषित संशोधित योजना के अनुसार पहले चरण में तत्काल 300 करोड़ रुपये खर्च कर रनवे, एयरसाइड ढांचे और डिजिटल प्रणालियों का आधुनिकीकरण किया जाना था। लेकिन योजना घोषित होने के करीब तीन महीने बाद भी ये कार्य निविदा और नियोजन के चरण में ही अटके दिखाई दे रहे हैं।

यात्रियों को नई सुविधाओं का अभी भी इंतजार

जीएमआर के अनुसार पहले चरण में मौजूदा टर्मिनल भवन का आधुनिकीकरण, यात्रियों का समय बचाने के लिए सेल्फ चेक-इन कियोस्क और सेल्फ बैगेज ड्रॉप जैसी सुविधाएं शुरू करना, विमानतल की वार्षिक यात्री क्षमता बढ़ाना और आधुनिक लाउंज तैयार करना शामिल है। हालांकि, संचालन अपने हाथ में लेने के साढ़े तीन महीने बाद भी यात्रियों को इन योजनाओं का जमीनी स्तर पर कोई बड़ा लाभ दिखाई नहीं दे रहा।

दूसरी रनवे और नए टर्मिनल पर भी सवाल

विमानतल के भविष्य के चरणों में दूसरी रनवे, नया टर्मिनल भवन और अंतरराष्ट्रीय कार्गो टर्मिनल बनाने की योजनाएं शामिल हैं। ऐसे में शुरुआती चरण में ही काम की धीमी गति को देखते हुए इन परियोजनाओं के निर्धारित समय पर पूरा होने को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

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2027 की समयसीमा के लिए अब तेज करना होगा काम

पहले चरण के लिए निर्धारित 1,300 करोड़ रुपये के निवेश और 2027 के अंत तक काम पूरा करने के लक्ष्य को देखते हुए अब जीएमआर को योजनाओं से आगे बढ़कर वास्तविक निर्माण कार्य शुरू करने की आवश्यकता है। यदि काम की मौजूदा गति बनी रही तो नागपुर विमानतल के विकास का महत्वाकांक्षी खाका समयसीमा से पीछे छूटने की आशंका बढ़ सकती है।

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