गणेशोत्सव में VIP दर्शन के नाम पर वसूली! 100 से 300 रुपये देकर पाएं गणराय के तुरंत दर्शन, बिना अनुमति लाखों की उगाही का आरोप

नागपुर: गणेशोत्सव के दौरान गणराय के जल्द दर्शन कराने के नाम पर शहर के कुछ गणेश मंडलों द्वारा श्रद्धालुओं से 100 से 300 रुपये तक की राशि लेने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए इस राशि के बदले कथित तौर पर वर्गणी यानी चंदे की रसीद दी जा रही है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि ली जा रही रकम वास्तव में दान है या दर्शन के लिए लिया जाने वाला शुल्क

VIP एंट्री के लिए 100 से 300 रुपये

  • Save

शहर के कुछ गणेश मंडलों में शाम के समय सोशल मीडिया पर वायरल रील्स के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सामान्य दर्शन के लिए कहीं-कहीं 45 मिनट से डेढ़ घंटे तक कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। ऐसे में कुछ मंडलों ने बिना कतार के जल्दी दर्शन कराने के लिए VIP एंट्री की व्यवस्था शुरू की है।

पैसे लेकर दी जा रही चंदे की रसीद

बताया जा रहा है कि श्रद्धालु 100 से 300 रुपये देकर VIP दर्शन कर रहे हैं और उन्हें इसके बदले रसीद दी जा रही है। सवाल यह है कि VIP एंट्री के लिए ली जा रही राशि को किस मद में दर्ज किया जा रहा है और क्या इसका पूरा हिसाब मंडल के रिकॉर्ड में रखा जा रहा है।

  • Save

धर्मादाय आयुक्तालय की अनुमति पर सवाल

सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों द्वारा चंदे या दान के रूप में धन संग्रह करने के लिए धर्मादाय आयुक्तालय से धारा 41(क) के तहत अनुमति लेना आवश्यक बताया गया है। इसके अनुसार रसीद पुस्तिका भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत छपवानी होती है। हालांकि, आरोप है कि कुछ मंडलों ने VIP पास के नाम पर राशि लेने के लिए अलग से अनुमति नहीं ली है।

हर रसीद और रकम की जांच जरूरी

VIP दर्शन के नाम पर ली जा रही राशि को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। इनमें कितने VIP पास जारी किए गए, कितनी रसीदें छापी गईं, राशि दान है या प्रवेश शुल्क, रकम आधिकारिक खाते में जमा हुई या नहीं और उसका उपयोग किस काम में किया गया, जैसे बिंदुओं की जांच जरूरी मानी जा रही है।

  • Save

धर्मादाय आयुक्तालय करेगा अचानक निरीक्षण?

धर्मादाय आयुक्तालय के परिपत्र में गणेश प्रतिमा स्थापित करने वाले स्थानों पर अचानक निरीक्षण कर निधि संग्रह की अनुमति की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही हर वर्ष उत्सव आयोजित करने वाले मंडलों से पिछले वर्षों का हिसाब मांगने के निर्देश भी दिए गए हैं। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि VIP दर्शन के नाम पर हो रही कथित वसूली की भी जांच की जाएगी या नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share via
Copy link