महाराष्ट्र में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत जारी की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। दावा किया जा रहा है कि नई ड्राफ्ट सूची में करीब 2 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल नहीं हैं। इससे सबसे बड़ा सवाल 2024 में तैयार की गई मतदाता सूची की विश्वसनीयता और उसमें हुए बड़े बदलाव को लेकर उठ रहा है।
2024 में 40 लाख मतदाताओं की हुई थी बढ़ोतरी
महाराष्ट्र की मतदाता सूची में 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच करीब 40 लाख मतदाताओं की वृद्धि हुई थी। उस समय मतदाताओं की संख्या में अचानक हुई इस बढ़ोतरी को लेकर सवाल उठे थे। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर भरोसा जताया था।
अब करीब दो साल बाद SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने की खबरों ने पुराने रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
करीब 2 करोड़ नाम हटने से उठे कई सवाल
SIR के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होने से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर दो वर्षों में मतदाता रिकॉर्ड में इतना बड़ा बदलाव कैसे हुआ।
यदि 2024 की मतदाता सूची व्यापक और उचित सत्यापन के बाद तैयार की गई थी, तो इतनी बड़ी संख्या में नाम अब SIR के दौरान बाहर क्यों हुए? इस सवाल का स्पष्ट जवाब फिलहाल आधिकारिक, कारणवार आंकड़े सामने आने के बाद ही मिल सकेगा।
मृत्यु, पलायन या डुप्लीकेट रिकॉर्ड की जांच जरूरी
यह भी स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि ड्राफ्ट सूची से बाहर किए गए नामों में कितने मतदाता मृत पाए गए, कितने स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले गए, कितने डुप्लीकेट रिकॉर्ड थे और कितने अन्य कारणों से हटाए गए।
इन आंकड़ों से यह समझने में मदद मिलेगी कि नाम हटाने की प्रक्रिया सामान्य मतदाता सूची शुद्धिकरण का हिस्सा है या 2024 की सूची में बड़ी संख्या में ऐसे नाम शामिल थे, जिनका अब सत्यापन किया जा रहा है।
ड्राफ्ट सूची से नाम हटना स्थायी रूप से मतदान अधिकार खत्म होना नहीं
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ड्राफ्ट मतदाता सूची से नाम बाहर होने का अर्थ मतदान का अधिकार स्थायी रूप से समाप्त होना नहीं है। SIR प्रक्रिया के तहत मतदाताओं को अपने नाम को लेकर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाता है।
दावे और आपत्तियों की जांच तथा आवश्यक सुनवाई के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी। इसलिए वास्तविक तस्वीर अंतिम SIR मतदाता सूची जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
अंतिम सूची से सामने आएगी पूरी तस्वीर
प्रशासन और निर्वाचन आयोग के लिए यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए करीब 2 करोड़ नामों में से कितने नाम अंतिम सूची में वापस शामिल किए जाते हैं।
साथ ही, मृत्यु, पलायन, डुप्लीकेट प्रविष्टि और अन्य कारणों के आधार पर हटाए गए नामों का विस्तृत आंकड़ा भी सार्वजनिक किया जाना अहम होगा।
महाराष्ट्र की राजनीति पर भी पड़ सकता है असर
मतदाता सूची में इतने बड़े बदलाव का महाराष्ट्र की राजनीति पर संभावित प्रभाव पड़ सकता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष पहले से ही चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर एक-दूसरे पर सवाल उठाते रहे हैं।
ऐसे में अंतिम SIR सूची केवल प्रशासनिक दस्तावेज नहीं होगी, बल्कि राज्य की राजनीतिक बहस में भी इसकी अहम भूमिका रहने की संभावना है।
सबसे बड़ा सवाल: 2024 से SIR तक इतना बड़ा अंतर क्यों?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि 2024 की मतदाता सूची में दर्ज संख्या और SIR के बाद सामने आने वाली अंतिम संख्या में इतना बड़ा अंतर क्यों है।
इसका स्पष्ट जवाब अंतिम मतदाता सूची और कारणवार आधिकारिक आंकड़े जारी होने के बाद ही सामने आएगा।

