शिपाई पिता के बेटे ने रचा इतिहास, कॉन्स्टेबल से UPSC में 39वीं रैंक तक का सफर, बने CISF असिस्टेंट कमांडेंट

नागपुर के वानाडोंगरी निवासी शुभम धोटे ने संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। धरमपेठ साइंस कॉलेज में शिपाई के रूप में कार्यरत अपने पिता के संघर्ष को करीब से देखने वाले शुभम ने महज 20 वर्ष की उम्र से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। कॉन्स्टेबल से लेकर हवलदार और सब-इंस्पेक्टर तक का सफर तय करने के बाद उन्होंने UPSC परीक्षा में देशभर में 39वीं रैंक हासिल की और अब CISF में असिस्टेंट कमांडेंट बनने जा रहे हैं।

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पिता के संघर्ष से मिली अधिकारी बनने की प्रेरणा

शुभम के पिता उसी धरमपेठ साइंस कॉलेज में शिपाई के रूप में कार्यरत थे, जहां शुभम ने पढ़ाई की। उन्होंने पिता को वर्षों तक मेहनत करते और काम के दबाव के बीच संघर्ष करते देखा। इसी से प्रेरित होकर शुभम ने संकल्प लिया कि पिता की सेवानिवृत्ति से पहले वे अपना एक अलग मुकाम बनाएंगे और अधिकारी बनकर देश की सेवा करेंगे।

20 साल की उम्र में शुरू किया सफलता का सफर

सरस्वती विद्यालय से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद शुभम ने धरमपेठ साइंस कॉलेज से 12वीं की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने कृषि विषय में बीएससी की डिग्री हासिल की। कॉलेज के दौरान ही उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी।

महज 20 वर्ष की उम्र में पहले ही प्रयास में CISF में कॉन्स्टेबल के रूप में उनका चयन हुआ। हालांकि उन्होंने इस सफलता को अंतिम मंजिल नहीं माना और लगातार आगे बढ़ते रहे।

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कॉन्स्टेबल से सब-इंस्पेक्टर तक बढ़ते गए कदम

नौकरी के साथ-साथ शुभम ने पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने कस्टम विभाग में हवलदार के रूप में सेवा दी और इसके बाद CRPF में सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्य किया। नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने UPSC की तैयारी जारी रखी।

UPSC में हासिल की 39वीं रैंक

लगातार मेहनत और अध्ययन में निरंतरता का परिणाम तब सामने आया, जब CISF में असिस्टेंट कमांडेंट के 73 पदों के लिए हुई चयन प्रक्रिया में शुभम ने देशभर में 39वीं रैंक हासिल की। इस उपलब्धि के साथ उनका अधिकारी बनने का सपना साकार हो गया।

पांच साल में तय किया संघर्ष से सफलता तक का सफर

कॉन्स्टेबल से असिस्टेंट कमांडेंट तक पहुंचने का शुभम का सफर करीब पांच वर्षों का रहा। हर पद पर मिली सफलता ने उन्हें अगले लक्ष्य के लिए प्रेरित किया। अब वे CISF में ग्रुप-ए अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभालने की दहलीज पर हैं।

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“पिता की सेवानिवृत्ति से पहले अधिकारी बनना था”

शुभम धोटे ने अपनी सफलता का श्रेय पिता के संघर्ष, परिवार के सहयोग और अपनी मेहनत को दिया। उन्होंने कहा कि पिता को कॉलेज में शिपाई के रूप में काम करते देखकर उन्हें हमेशा प्रेरणा मिली। पिता की सेवानिवृत्ति से पहले अधिकारी बनना उनका मुख्य ध्येय था। लगातार मेहनत, पढ़ाई में निरंतरता और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।

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