नागपुर की होनहार युवा डॉक्टर खुशी मुंदडा का समाजसेवा और चिकित्सा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना एक भीषण सड़क हादसे ने हमेशा के लिए छीन लिया। सांगली में गुरुवार तड़के हुए दर्दनाक सड़क हादसे में डॉ. खुशी मुंदडा की मौत हो गई। उनके निधन की खबर नागपुर पहुंचते ही परिवार, रिश्तेदारों और मित्रों में शोक की लहर दौड़ गई।
समाजसेवा के सपने देख रही थीं खुशी
डॉ. खुशी ने सफेद एप्रन पहनकर मरीजों के चेहरों पर मुस्कान लाने का सपना देखा था। डॉक्टर बनने के बाद वह समाज के लिए कुछ बड़ा करने और जरूरतमंद लोगों की सेवा करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही थीं। वह आने वाले वर्षों में अपनी पोस्टग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर चिकित्सा क्षेत्र में योगदान देना चाहती थीं।
मुंदडा परिवार की पहली डॉक्टर थीं खुशी
नागपुर के शिवाजीनगर स्थित दिग्विजय अपार्टमेंट में रहने वाली खुशी, व्यवसायी पवन मुंदडा और मनोवैज्ञानिक राखी मुंदडा की बेटी थीं। परिवार में उनकी एक बड़ी बहन मुंबई में फिजियोथेरेपी की पढ़ाई कर रही हैं, जबकि छोटा भाई दसवीं कक्षा में पढ़ रहा है।
पढ़ाई में शुरू से थीं बेहद होनहार
खुशी बचपन से ही पढ़ाई में काफी प्रतिभाशाली थीं। उन्होंने अकोला शासकीय मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद वह मिरज के मेडिकल कॉलेज में पोस्टग्रेजुएशन कर रही थीं। परिवार की पहली डॉक्टर होने के कारण उनके भविष्य को लेकर पूरे परिवार को बड़ी उम्मीदें थीं।
एक हादसे ने तोड़ दिए परिवार के सपने
खुशी के लिए परिवार ने कई सपने संजोए थे। उनके डॉक्टर बनने और समाजसेवा करने की उम्मीदें परिवार के हर सदस्य से जुड़ी थीं। लेकिन सांगली में हुए भीषण सड़क हादसे ने कुछ ही पल में इन सभी सपनों को खत्म कर दिया।
नागपुर पहुंची मौत की खबर तो मचा कोहराम
डॉ. खुशी के निधन की खबर जैसे ही नागपुर पहुंची, मुंदडा परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों के बीच शोक की लहर फैल गई। उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुक्रवार, 7 अगस्त को सुबह 9 बजे नागपुर के अंबाझरी घाट पर होने की जानकारी दी गई है।
‘बेहद मिलनसार और संवेदनशील थीं खुशी’
परिवार के मित्र योगेशबाबू मालपाणी ने खुशी को याद करते हुए बताया कि वह बेहद मिलनसार और संवेदनशील स्वभाव की थीं। किसी को मदद की जरूरत होने पर वह सबसे पहले आगे आती थीं। डॉक्टर बनकर समाज के लिए कुछ बड़ा करने का उनका सपना था, लेकिन नियति ने उन्हें यह सपना पूरा करने का अवसर नहीं दिया।
परिवार ने खोया होनहार व्यक्तित्व
खुशी के असमय निधन से परिवार ने केवल अपनी बेटी ही नहीं, बल्कि एक गुणी, संवेदनशील और उम्मीदों से भरा व्यक्तित्व खो दिया। उनके निधन ने उन सभी लोगों को गहरा सदमा दिया है, जो उन्हें करीब से जानते थे।

