ई-20 पेट्रोल का बढ़ता असर: वाहनों में खराबी की बढ़ी शिकायतें, आम लोगों की जेब पर पड़ रहा भारी बोझ

नागपुर में ई-20 मिश्रित पेट्रोल को लेकर वाहन चालकों और मैकेनिक्स के बीच चिंता बढ़ती जा रही है। शहर के कई गैरेज संचालकों और विशेषज्ञों का दावा है कि इस ईंधन के कारण वाहनों में तकनीकी खराबियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे आम लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ई-20 पेट्रोल से बढ़ी तकनीकी समस्याएं

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मेकॅनिक्स के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में वाहनों में निम्न समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं:

  • इंजन की लाइफ कम होना
  • पिकअप में गिरावट
  • माइलेज (एवरेज) कम मिलना
  • फ्यूल पंप, इंजेक्टर और कार्बोरेटर में खराबी
  • फ्यूल टैंक में चिपचिपा पदार्थ जमा होना

खासकर BS-6 वाहनों और लंबे समय तक खड़े रहने वाले वाहनों में ये समस्याएं ज्यादा गंभीर रूप में सामने आ रही हैं।

इंजन और पार्ट्स पर गंभीर असर

मेकॅनिक निशांत चिंचखेडे के अनुसार:

  • पिस्टन ब्लॉक और कार्बोरेटर खराब हो रहे हैं
  • इंजन का कॉम्प्रेशन कमजोर हो रहा है
  • स्पार्क प्लग, कॉइल और एक्सिलरेटर सिस्टम में दिक्कतें आ रही हैं

पिछले एक महीने में ही करीब 20 वाहनों में ऐसी खराबियां दर्ज की गई हैं, जिसका मुख्य कारण पेट्रोल की गुणवत्ता में गिरावट बताया जा रहा है।

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फ्यूल टैंक में बन रहा चिपचिपा थर

मेकॅनिक गणेश रामटेककर ने बताया कि:

  • पेट्रोल का रंग पारदर्शी के बजाय पीला दिख रहा है
  • कई वाहनों के टैंक में चिपचिपा पदार्थ जमा हो रहा है

उन्होंने यह भी बताया कि BS-4 वाहन इस ईंधन को अपेक्षाकृत बेहतर सहन कर लेते हैं, जबकि BS-6 वाहनों में एडवांस सेंसर और इंजेक्शन सिस्टम होने के कारण समस्या ज्यादा तेजी से दिखती है

फ्यूल टैंक की सफाई बन रही मजबूरी

मेकॅनिक अरुण जीवने के मुताबिक:

  • फ्यूल सिस्टम में जमा गंदगी से एक्सिलरेटर जाम हो रहा है
  • पिछले दो महीनों में 8 से 10 वाहनों में यह समस्या सामने आई

ऐसी स्थिति में अब फ्यूल टैंक की सफाई करना जरूरी हो गया है, जिससे अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है।

चार पहिया वाहनों में ज्यादा खतरा

गैरेज विशेषज्ञ मशर्रत आलम के अनुसार:

  • दोपहिया वाहन जल्दी पेट्रोल खत्म कर देते हैं, इसलिए उनमें असर कम दिखता है
  • लेकिन चार पहिया वाहनों में ज्यादा पेट्रोल भरा रहता है, जिससे खराबी की संभावना अधिक बढ़ जाती है

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बारिश के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो सकती है

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माइलेज को लेकर बढ़ी शिकायतें

मेकॅनिकल इंजीनियर निखिल उंबरकर ने बताया कि:

  • उनके गैरेज में हर महीने 75-80 वाहन सर्विसिंग के लिए आते हैं
  • इनमें से 10 में से 8 ग्राहक माइलेज कम होने की शिकायत करते हैं

एक उदाहरण में, Ertiga कार का पिकअप कम हो गया था।
फ्यूल टैंक की सफाई के बाद ही गाड़ी का प्रदर्शन सुधरा।

इंजन की उम्र में आई भारी कमी

विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • पहले वाहन का इंजन 5-10 साल तक बिना बड़ी मरम्मत के चलता था
  • अब 1.5 से 2 साल में ही इंजन खोलने की नौबत आ रही है

इसका कारण बताते हुए कहा गया कि इथेनॉल पेट्रोल की तुलना में अलग तरीके से जलता है, जिससे इंजन में काज (कार्बन) जमा होने लगती है और ईंधन सप्लाई प्रभावित होती है।

आम लोगों पर बढ़ता आर्थिक बोझ

ई-20 पेट्रोल के कारण बढ़ती इन समस्याओं से:

  • वाहन मालिकों का मेंटेनेंस खर्च बढ़ गया है
  • बार-बार मरम्मत और सर्विसिंग की जरूरत पड़ रही है

इससे साफ है कि ई-20 ईंधन का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है, और आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

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