नागपुर: झटपट लोन देने का झांसा देकर लोगों को फंसाने वाले ‘मस्त मनी’ फर्जी लोन ऐप घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार इस रैकेट ने अब तक करीब 234 करोड़ रुपये की ठगी की है और इसका नेटवर्क देश के साथ-साथ विदेशों तक फैला हुआ है।
फर्जी लोन ऐप के जरिए करोड़ों की ठगी
साइबर अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त दीपक अग्रवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ‘मस्त मनी’ ऐप के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को लोन का लालच देकर जाल में फंसाया जाता था। इस ऐप के जरिए बड़ी संख्या में लोगों से पैसे वसूले गए और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया गया।
मुख्य आरोपी कामिल सिद्दीकी गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी कामिल सिद्दीकी (उम्र 31 वर्ष) को भोपाल से गिरफ्तार किया है। कामिल सिद्दीकी काजीपुरा बैरसिया, भोपाल (मध्य प्रदेश) का निवासी है। वह इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जिसने तकनीकी रूप से इस ठगी को अंजाम दिया।
टेलीग्राम के जरिए बना अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह में कुल चार सदस्य शामिल हैं, जो टेलीग्राम चैनल के माध्यम से जुड़े थे। गिरोह के अलग-अलग सदस्यों की भूमिकाएं तय थीं—
- एक व्यक्ति फर्जी स्मॉल फाइनेंस कंपनी का काम संभालता था
- दूसरा वसूली और धमकाने का काम करता था
- तीसरा ब्लैकमेलिंग करता था
- जबकि कामिल सिद्दीकी ऐप डेवलपमेंट और टेक्निकल ऑपरेशन संभालता था
5 लाख से ज्यादा लोगों ने डाउनलोड किया ऐप
इस फर्जी ऐप को देशभर में 5 लाख 32 हजार से अधिक लोगों ने डाउनलोड किया था। जब ठगी का खुलासा हुआ, तब करीब 2 लाख 98 हजार यूजर्स ने ऐप डिलीट कर दिया, लेकिन अभी भी 2 लाख 34 हजार लोग इस जाल में फंसे हुए हैं।
मोबाइल डेटा के जरिए ब्लैकमेलिंग और मानसिक उत्पीड़न
जांच में यह भी सामने आया है कि ऐप डाउनलोड करते समय यूजर्स ने अपने मोबाइल का डेटा एक्सेस दे दिया था। इसी डेटा का इस्तेमाल कर आरोपी लोगों को ब्लैकमेल और मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे।
टेरर लिंक की भी जांच जारी
इतनी बड़ी रकम की वसूली को देखते हुए पुलिस अब इस मामले में टेरर लिंक की भी जांच कर रही है। इसके अलावा यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध था, इसलिए जरूरत पड़ने पर गूगल को भी नोटिस जारी किया जा सकता है।
पुलिस की चेतावनी: ऐप डाउनलोड करते समय रहें सतर्क
पुलिस उपायुक्त ने नागरिकों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी अनजान ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी पूरी जानकारी जरूर जांचें। बिना सोचे-समझे मोबाइल डेटा की अनुमति देने से बड़ा आर्थिक और मानसिक नुकसान हो सकता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं, इसलिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

