नागपुर: ऑनलाइन लोन के नाम पर लोगों को जाल में फंसाकर आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाले ‘मस्त मनी’ ऐप रैकेट का नागपुर क्राइम ब्रांच ने बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने भोपाल में छापा मारकर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है और उसे नागपुर लाया गया है। प्रारंभिक जांच में देशभर में बड़े स्तर पर ठगी होने की आशंका जताई जा रही है।
कर्ज देने से पहले ही मोबाइल डेटा की चोरी
इस रैकेट का तरीका बेहद खतरनाक था। आरोपी पहले लोगों को जल्दी और आसान ऑनलाइन लोन का लालच देते थे, लेकिन ऐप डाउनलोड करते ही मोबाइल का पूरा डेटा चोरी कर लिया जाता था। इसी डेटा के आधार पर बाद में पीड़ितों को ब्लैकमेल किया जाता था।
छोटे कर्ज के बदले भारी वसूली
जानकारी के अनुसार, आरोपी 15,000 रुपये का लोन देकर 30 दिनों में 25,000 रुपये तक वसूलते थे। यदि कोई व्यक्ति समय पर भुगतान नहीं कर पाता, तो उससे और ज्यादा रकम की मांग की जाती थी, जिससे पीड़ित कर्ज के जाल में फंसता चला जाता था।
अश्लील फोटो बनाकर करते थे ब्लैकमेल
रैकेट के सदस्य पीड़ितों के फोटो को मॉर्फ कर अश्लील तस्वीरें बनाते थे और फिर उन्हें उनके मोबाइल में सेव सभी कॉन्टैक्ट्स पर भेजने की धमकी देते थे। कई मामलों में वास्तव में अश्लील फोटो और मैसेज भेजकर सामाजिक बदनामी की जाती थी, जिससे पीड़ित मानसिक रूप से टूट जाते थे।
नागपुर की महिला बनी शिकार, शिकायत के बाद खुलासा
नागपुर की एक महिला इस रैकेट का शिकार बनी, जिसके बाद उसने साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। इसी शिकायत के आधार पर क्राइम ब्रांच के उपायुक्त दीपक अग्रवाल के नेतृत्व में जांच शुरू की गई और आरोपी तक पहुंच बनाई गई।
VPN का इस्तेमाल कर छिपाते थे लोकेशन
आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए VPN (Virtual Private Network) का इस्तेमाल करते थे, जिससे उनकी लोकेशन ट्रेस करना मुश्किल था। हालांकि, एक बार ईमेल के जरिए लॉग-इन करने पर पुलिस को अहम सुराग मिला, जिससे जांच सीधे भोपाल तक पहुंची।
भोपाल से आरोपी गिरफ्तार, नेटवर्क देशभर में फैला
क्राइम ब्रांच की टीम ने भोपाल में छापा मारकर रैकेट के एक आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह का नेटवर्क देशभर में फैला हुआ है और इसमें कई अन्य आरोपी भी शामिल हो सकते हैं।
5 लाख लोगों ने डाउनलोड किया ‘मस्त मनी’ ऐप
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ‘मस्त मनी’ ऐप को पिछले 6–8 महीनों में करीब 5 लाख लोगों ने डाउनलोड किया, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि पीड़ितों की संख्या लाखों में हो सकती है।
पुलिस का बयान
क्राइम ब्रांच के उपायुक्त दीपक अग्रवाल ने कहा कि, इस रैकेट से जुड़े पीड़ितों की संख्या और ठगी की कुल रकम का खुलासा आगे की जांच में होगा। साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि इस गिरोह के और भी सदस्य जल्द गिरफ्तार किए जा सकते हैं।
इस मामले पर आपकी क्या राय है? क्या ऐसे ऑनलाइन लोन ऐप्स पर सख्त प्रतिबंध लगना चाहिए? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में जरूर दें।

