नागपुर: शहर में जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। दक्षिण नागपुर के सिद्धेश्वरी झोपड़पट्टी क्षेत्र में दलालों द्वारा अशिक्षित और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाकर फर्जी जन्म प्रमाणपत्र थमाने और हजारों रुपये वसूलने का खुलासा हुआ है। इस पूरे मामले का पर्दाफाश नगर निगम (मनपा) के अधिकारियों ने जांच के दौरान किया।
जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा
मनपा के जन्म-मृत्यु पंजीकरण विभाग की टीम ने जब क्षेत्र में दस्तावेजों की जांच की, तो कई जन्म प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए।
- प्रमाणपत्रों पर हनुमाननगर जोन का शिक्का और अधिकारियों के हस्ताक्षर दिखाई दिए
- लेकिन जांच में ये सभी दस्तावेज पूरी तरह फर्जी पाए गए
अशिक्षा और गरीबी का उठाया गया फायदा
सिद्धेश्वरनगर क्षेत्र में करीब 150 से 200 परिवार, मुख्यतः आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं।
- शिक्षा का अभाव और सीमित सुविधाएं होने के कारण लोग सरकारी प्रक्रियाओं से दूर हैं
- अधिकांश बच्चों का जन्म घर पर होने से जरूरत पड़ने पर ही प्रमाणपत्र बनवाया जाता है
- इसी स्थिति का फायदा उठाकर दलालों ने लोगों को जाल में फंसाया
3 से 3.5 हजार रुपये लेकर थमाए फर्जी प्रमाणपत्र
जानकारी के अनुसार, दलालों ने
- जन्म प्रमाणपत्र बनवाने का झांसा देकर 3,000 से 3,500 रुपये तक वसूले
- पैसे लेने के बाद लोगों को फर्जी दस्तावेज सौंप दिए
QR कोड से खुला फर्जीवाड़े का राज
जांच के दौरान अधिकारियों ने बताया कि
- 2016 के बाद जारी जन्म प्रमाणपत्रों पर QR कोड अनिवार्य होता है
- जांच में मिले कई प्रमाणपत्रों पर QR कोड नहीं था, जिससे उनकी फर्जी होने की पुष्टि हुई
डॉ. अतीक खान (वैद्यकीय अधिकारी व उपनिबंधक, मनपा) ने बताया कि इन प्रमाणपत्रों की सत्यता संदिग्ध है और यह पता लगाना जरूरी है कि इन्हें कहां से बनवाया गया।
बड़े फर्जी दस्तावेज रैकेट की आशंका
इस क्षेत्र में पहले भी फर्जी जाति प्रमाणपत्र का मामला सामने आ चुका है।
- एक महिला के पास अलग-अलग नंबर के तीन आधार कार्ड मिलने की जानकारी भी सामने आई है
- इससे संकेत मिलता है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाला बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है
अन्य झोपड़पट्टियों में भी फैल सकता है जाल
सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, यह मामला केवल सिद्धेश्वरी तक सीमित नहीं है।
- शहर के आसपास की अन्य झोपड़पट्टियों में भी
- अशिक्षित नागरिकों को इसी तरह ठगा जा रहा है
इस पूरे मामले ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है और अब इस फर्जीवाड़े के नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच तेज कर दी गई है।

