नागपुर: नागपुर महानगरपालिका (मनपा) के शिक्षा विभाग में प्रशासनिक लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण शहर की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट में पहुंच गई है। बीते 10 वर्षों में मनपा की आधी से ज्यादा स्कूलें बंद हो चुकी हैं, जबकि जो स्कूलें बची हैं, वे भी अब बंद होने के कगार पर हैं।
स्कूलों की संख्या में भारी गिरावट
- वर्ष 2016 में मनपा के पास कुल 225 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलें थीं
- वर्तमान में यह संख्या घटकर सिर्फ 113 स्कूलों तक रह गई है
- इनमें 85 प्राथमिक और 28 माध्यमिक स्कूल शामिल हैं
छात्र संख्या में 11 हजार की गिरावट
- 10 साल पहले मनपा स्कूलों में करीब 25,000 छात्र पढ़ाई कर रहे थे
- अब यह संख्या घटकर सिर्फ 14,000 रह गई है
- यानी करीब 11,000 छात्रों ने मनपा स्कूलों से दूरी बना ली है
खराब सुविधाएं और गिरता शिक्षा स्तर बना कारण
- स्कूलों की जर्जर इमारतें
- मूलभूत सुविधाओं का अभाव
- शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट
इन कारणों से हर साल स्कूल बंद होते गए और अभिभावकों का भरोसा भी कम होता चला गया।
शिक्षकों की भारी कमी से संकट गहराया
- प्राथमिक स्कूलों में 328 शिक्षकों की जरूरत, लेकिन सिर्फ 251 शिक्षक कार्यरत
- माध्यमिक स्कूलों में 210 की जरूरत, लेकिन मात्र 90 शिक्षक उपलब्ध
- 1 जुलाई से नए सत्र की शुरुआत के बावजूद शिक्षक संकट जस का तस
2026 के अंत तक और बिगड़ेगी स्थिति
- दिसंबर 2026 में 140 शिक्षक एक साथ सेवानिवृत्त होंगे
- इनमें 100 प्राथमिक और 40 माध्यमिक शिक्षक शामिल हैं
- साल के अंत तक मनपा के पास सिर्फ 201 शिक्षक ही बचेंगे
- ऐसे में सवाल उठ रहा है कि स्कूलों का संचालन कैसे होगा
शिक्षकों का आर्थिक शोषण भी आया सामने
- कई प्राथमिक शिक्षकों को माध्यमिक स्कूलों में काम कराया जा रहा है
- लेकिन उन्हें वेतन केवल प्राथमिक शिक्षक के अनुसार दिया जा रहा है
- इस स्थिति को लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश है
भर्ती प्रक्रिया 33 साल से ठप
- वर्ष 1993 से शिक्षक भर्ती प्रक्रिया रुकी हुई है
- “बिंदूनामावली” लंबित होने के कारण नई भर्ती नहीं हो पा रही
- इससे शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है
स्कूलों की जमीन पर भी खतरा
- बंद हो चुकी कई स्कूलें प्राइम लोकेशन पर स्थित हैं
- इन जमीनों पर निजी डेवलपर्स की नजर होने की आशंका जताई जा रही है
- भविष्य में इनका निजीकरण होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता
पूर्व सभापति के प्रयासों के बाद बिगड़ी स्थिति
- पूर्व शिक्षा समिति सभापति गोपाल बोहरे ने अपने कार्यकाल में सुधार के प्रयास किए
- उनके प्रयासों से 8 स्कूलों को ISO प्रमाणपत्र मिला था
- स्कूलों में पानी और अन्य सुविधाएं सुनिश्चित की गई थीं
- उस समय छात्र संख्या 25 हजार के पार थी
- वर्तमान में स्थिति पूरी तरह विपरीत हो चुकी है
अभिभावकों में बढ़ता आक्रोश
- बिना शिक्षक और सुविधाओं के चल रही स्कूलों से
गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों का भविष्य खतरे में है - अभिभावकों ने प्रशासन से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है
- चेतावनी दी गई है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो बाकी 113 स्कूलें भी बंद हो सकती हैं
यह पूरी स्थिति नागपुर की शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में मनपा की स्कूलें पूरी तरह खत्म होने की कगार पर पहुंच सकती हैं।

