नागपुर में लगातार सामने आ रही आग की घटनाओं के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है। शहर में 500 से अधिक इमारतें ऐसी हैं जिन्हें रिहायशी (रेजिडेंशियल) मंजूरी मिली है, लेकिन उनका इस्तेमाल व्यावसायिक (कमर्शियल) रूप में किया जा रहा है, जिससे सुरक्षा और नियमों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आग की घटनाओं के बाद खुली बड़ी लापरवाही
पिछले कुछ दिनों में शहर की ऊंची इमारतों में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि अग्निशमन विभाग ने आग पर काबू पाया, लेकिन जांच के दौरान नियमों के उल्लंघन और अवैध उपयोग के मामले उजागर हुए हैं।
10 जोन में फैली है समस्या
महापालिका के सभी 10 जोनों में ऐसी 500 से ज्यादा इमारतें चिन्हित की गई हैं, जिनके नक्शे रिहायशी उपयोग के लिए मंजूर हैं, लेकिन उनका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन
रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों के लिए अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) के नियम अलग-अलग होते हैं। व्यावसायिक इमारतों के लिए कानून अधिक सख्त है, लेकिन इन इमारतों में जरूरी सुरक्षा उपकरण और मानकों का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है।
कार्रवाई का अधिकार, फिर भी उदासीनता
नियमों के अनुसार, यदि किसी इमारत का उपयोग मंजूरी के विपरीत किया जाता है, तो संबंधित जोन के सहायक आयुक्त को कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। इसमें इमारत को सील करना भी शामिल है।
अग्निशमन विभाग ने भेजीं नोटिस
अग्निशमन विभाग ने इस मामले में सभी जोनों के सहायक आयुक्तों को नोटिस जारी किए हैं। विभाग ने नियमों के उल्लंघन के आधार पर कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी।
एक भी इमारत पर नहीं हुई कार्रवाई
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में उल्लंघन सामने आने के बावजूद एक भी इमारत पर कार्रवाई नहीं की गई है। इससे महापालिका की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
शहर की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा
इस तरह के अवैध उपयोग और लापरवाही के कारण नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में बड़े हादसे हो सकते हैं।
यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि शहर में नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

