मेडिकल अस्पताल में मानवता शर्मसार: घायल वृद्ध की फर्श पर घिसटकर मदद की तलाश, व्हीलचेयर तक नहीं मिली

Nagpur स्थित मेडिकल अस्पताल परिसर में सोमवार को एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला दृश्य सामने आया, जिसने अस्पताल व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया। गंभीर रूप से घायल एक वृद्ध मरीज को व्हीलचेयर या स्ट्रेचर न मिलने के कारण जमीन पर बैठकर ही अपने हाथों के सहारे रेंगते हुए आगे बढ़ना पड़ा।

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अस्पताल परिसर में दर्दनाक दृश्य: मदद के बिना संघर्ष
घायल वृद्ध व्यक्ति के पैर में गंभीर चोट लगी हुई थी, जिससे उनके लिए खड़ा होना भी असंभव था। इसके बावजूद अस्पताल परिसर में उन्हें समय पर सहायता नहीं मिली। वे दर्द से कराहते हुए जमीन पर बैठकर खुद को घसीटते हुए आगे बढ़ने को मजबूर दिखे।

व्हीलचेयर और कर्मचारी उपलब्ध, फिर भी मरीज बेहाल
अस्पताल में व्हीलचेयर और स्ट्रेचर उपलब्ध होने के बावजूद मरीज को समय पर सहायता नहीं मिल सकी। मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि सहायक कर्मचारियों की कमी और व्यवस्था में लापरवाही के कारण मरीजों को कठिनाई झेलनी पड़ रही है।

ओपीडी में भारी दबाव और कर्मचारियों की कमी
ओपीडी विभाग में मरीजों की संख्या अत्यधिक होने के कारण व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

  • रोजाना 2000 से अधिक मरीज ओपीडी में आते हैं
  • 500 से अधिक मरीज आपातकालीन विभाग में पहुंचते हैं
  • सहायक कर्मचारियों की भारी कमी बनी हुई है
  • उपलब्ध कर्मचारियों पर अत्यधिक कार्यभार है

कर्मचारियों की कमी से प्रभावित सेवाएं
ओपीडी इंचार्ज सिस्टर कल्पना वैद्य के अनुसार कर्मचारियों की कमी के कारण समय पर सभी मरीजों को सहायता देना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि अगर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए, तो मरीजों को बेहतर सेवा दी जा सकती है।

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स्ट्रेचर कक्ष में तालाबंदी, मरीजों की परेशानी बढ़ी
रिपोर्ट के अनुसार कई बार स्ट्रेचर और व्हीलचेयर चोरी या गलत उपयोग से बचाने के लिए उन्हें लॉक कर दिया जाता है। इससे आपात स्थिति में आए मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

  • रोजाना 100 से अधिक मरीजों को व्हीलचेयर की आवश्यकता
  • केवल कुछ ही कर्मचारी पूरे विभाग में तैनात
  • कई बार परिजन स्वयं मरीजों को उठाकर ले जाने को मजबूर

व्यवस्था पर गंभीर सवाल, मरीजों की पीड़ा उजागर
यह घटना अस्पताल की व्यवस्थागत खामियों और मानव संसाधन की कमी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जहां एक ओर मरीज इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, वहीं उन्हें बुनियादी सहायता तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

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