लिव-इन पार्टनर की हत्या करने वाले आरोपी को जन्मठेप की सजा

नागपुर: नागपुर जिले के बुटीबोरी एमआईडीसी क्षेत्र में लिव-इन में रहने वाली महिला की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। सत्र न्यायाधीश अनिलकुमार शर्मा की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (जन्मठेप) की सजा सुनाई है। यह घटना 26 फरवरी 2024 की रात को बीडगणेशपुर इलाके में हुई थी।

मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी का नाम रणजीत नत्थू चौधरी (42) है, जो धारीमेटा, जिला पांढुर्णा (मध्य प्रदेश) का निवासी है। वहीं मृत महिला की पहचान सुनीता सहदेव राऊत के रूप में हुई है, जो हिंगणा तहसील के बीडगणेशपुर क्षेत्र में रहती थी।

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10 साल से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे दोनों

जानकारी के अनुसार, रणजीत चौधरी और सुनीता राऊत पिछले करीब 10 वर्षों से बिना विवाह किए पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे थे। दोनों सुनीता के घर में ही रहते थे।

पैसों के विवाद ने लिया खौफनाक रूप

26 फरवरी 2024 की रात दोनों के बीच पैसों को लेकर जोरदार विवाद हुआ। विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में आकर रणजीत चौधरी ने सुनीता का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी

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हत्या के बाद आरोपी ने किया आत्महत्या का प्रयास

हत्या करने के बाद आरोपी ने चाकू से अपना ही गला काटकर आत्महत्या करने की कोशिश की। हालांकि गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के बाद वह बच गया।

दो साल के भीतर अदालत ने सुनाया फैसला

इस मामले की खास बात यह रही कि अदालत ने करीब दो वर्षों के भीतर इस हत्या के मामले का फैसला सुनाया। घटना के बाद एमआईडीसी बुटीबोरी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

पुलिस ने मजबूत सबूतों के साथ पेश किया आरोपपत्र

मामले की जांच उस समय के ठाणेदार एवं सहायक पुलिस निरीक्षक राजीव कर्मलवार ने की। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 309 (आत्महत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया और मजबूत साक्ष्य जुटाकर मार्च 2024 में अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।

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अदालत ने सुनाई यह सजा

सभी गवाहों और सबूतों की जांच के बाद अदालत ने आरोपी रणजीत चौधरी को दोषी ठहराते हुए निम्न सजा सुनाई—

  • धारा 302 के तहत आजीवन कारावास (जन्मठेप) और 5000 रुपये जुर्माना
  • जुर्माना न भरने पर 6 महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास
  • धारा 309 के तहत 1 वर्ष का साधारण कारावास और 2000 रुपये जुर्माना
  • जुर्माना न भरने पर 1 महीने की अतिरिक्त सजा

इस फैसले के साथ अदालत ने स्पष्ट किया कि हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषी को कड़ी सजा मिलना आवश्यक है, ताकि समाज में कानून का भय बना रहे।

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