मुंबई: महाराष्ट्र की भाषा नीति को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि राज्य में अब केवल मराठी भाषा को अनिवार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मराठी को बढ़ावा देना और उसे प्रशासनिक तथा शैक्षणिक स्तर पर मजबूत करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि महाराष्ट्र की पहचान उसकी मराठी भाषा और संस्कृति से है, इसलिए इसे संरक्षित और प्रोत्साहित करना सरकार का दायित्व है।
मराठी भाषा को बढ़ावा देने का उद्देश्य
राज्य सरकार का कहना है कि इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य मराठी भाषा का संरक्षण और संवर्धन करना है।
सरकार का मानना है कि मराठी को अनिवार्य करने से नई पीढ़ी में अपनी मातृभाषा के प्रति जागरूकता और सम्मान बढ़ेगा।
शिक्षा और प्रशासन में अनिवार्यता
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में मराठी भाषा का उपयोग अनिवार्य किया जाएगा।
सरकारी कामकाज और आधिकारिक संचार में मराठी को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे राज्य की भाषा को संस्थागत मजबूती मिले।
अन्य भाषाओं पर कोई प्रतिबंध नहीं
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इस निर्णय का मतलब अन्य भाषाओं पर प्रतिबंध लगाना नहीं है।
हिंदी और अंग्रेजी सहित अन्य भाषाएं पहले की तरह पढ़ाई और संवाद में उपलब्ध रहेंगी, लेकिन मराठी को प्राथमिक और अनिवार्य भाषा का दर्जा दिया जाएगा।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
कुछ संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है और इसे मराठी अस्मिता से जोड़कर देखा है, वहीं विपक्ष ने इस पर विस्तृत नीति स्पष्ट करने की मांग की है।
राज्य सरकार जल्द ही इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकती है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि यह निर्णय किन-किन क्षेत्रों में और किस प्रकार लागू किया जाएगा।

