सरकारी ब्लड बैंक में पर्याप्त स्टॉक, दैनिक मांग 20 यूनिट से घटकर 8 पर; बाहर 1500 रुपये तक वसूली का आरोप
नागपुर | मेयो अस्पताल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सरकारी ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में रक्त उपलब्ध होने के बावजूद जरूरतमंद मरीजों के परिजनों को बाहर से रक्त लाने के लिए कहा जा रहा है। इस वजह से ब्लड बैंक की प्रतिदिन की औसत मांग 20 यूनिट से घटकर महज 8 यूनिट तक पहुंच गई है।
सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में रक्तदान शिविरों के माध्यम से मेयो ब्लड बैंक में भरपूर स्टॉक जमा हुआ है। इसके बावजूद भर्ती मरीजों के परिजनों को निजी ब्लड बैंकों से रक्त लाने की सलाह दी जा रही है। इस संबंध में कुछ मरीजों के परिजनों ने पुष्टि भी की है कि उन्हें अस्पताल से बाहर भेजा गया।
📌 मुख्य बिंदु
- सरकारी ब्लड बैंक में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध
- प्रतिदिन की मांग 20 यूनिट से घटकर 8 यूनिट
- निजी ब्लड बैंकों में ₹1200 से ₹1500 प्रति यूनिट वसूली
- सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों को रक्त नि:शुल्क उपलब्ध
अधिकारी को दी गई सूचना
ब्लड बैंक से रोजाना विभिन्न विभागों में भर्ती मरीजों के लिए औसतन 20 यूनिट रक्त की आपूर्ति होती थी। लेकिन पिछले कुछ दिनों से मांग में अचानक गिरावट दर्ज की गई है। सूत्रों के अनुसार, इस विषय की जानकारी ब्लड बैंक के एक अधिकारी को भी दी गई है।
सांठगांठ की आशंका
बाहर से रक्त लाने की सलाह के पीछे संभावित सांठगांठ की भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि कुछ निजी ब्लड बैंकों और डॉक्टरों के बीच मिलीभगत हो सकती है। नियमों के अनुसार, यदि आवश्यक रक्त उपलब्ध नहीं होता तो कागजात पर ‘NA’ दर्ज किया जाता है और फिर बाहर से रक्त मंगाने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। सवाल यह उठ रहा है कि जब स्टॉक उपलब्ध है तो ‘NA’ क्यों लिखा जा रहा है?
सरकारी अस्पताल में रक्त नि:शुल्क
सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को ब्लड बैंक से नि:शुल्क रक्त उपलब्ध कराया जाता है। वहीं निजी ब्लड बैंकों में सामान्य ब्लड ग्रुप (जैसे बी पॉजिटिव) के लिए 1200 से 1500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। इतना ही नहीं, रक्तदान शिविर के आयोजकों और रक्तदाताओं को भी कार्ड के आधार पर नि:शुल्क रक्त दिया जाता है।
अधिष्ठाता का बयान
मेयो अस्पताल के अधिष्ठाता डॉ. रवि चव्हाण ने कहा:
“ब्लड बैंक में भरपूर स्टॉक उपलब्ध है। किसी भी जरूरतमंद को बाहर से ब्लड लाने की आवश्यकता नहीं है। यदि किसी को बाहर भेजा जा रहा है तो यह गलत है। मामले की पूरी जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
अब बड़ा सवाल यह है कि जब सरकारी ब्लड बैंक में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, तो आखिर मरीजों के परिजनों को निजी ब्लड बैंकों का रुख क्यों करना पड़ रहा है? क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या फिर किसी बड़े खेल का हिस्सा? जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

