घटना का विवरण
नागपुर में NEET-UG परीक्षा से जुड़ा एक बेहद दुखद मामला सामने आया है, जहां एक 18 वर्षीय मेडिकल छात्रा ने आत्महत्या कर ली। मृतका की पहचान आकांक्षा चतुर्वेदी के रूप में हुई है, जो मूल रूप से मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की रहने वाली थी और नागपुर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी। परिजनों के अनुसार, हाल ही में हुई पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की घटना के बाद वह गंभीर मानसिक तनाव में थी।
परीक्षा रद्द होने के बाद बढ़ा तनाव
जानकारी के अनुसार आकांक्षा उन लाखों छात्रों में शामिल थी जिन्होंने 3 मई 2026 को NEET-UG परीक्षा दी थी। परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी थी और 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की थी। इसी फैसले के बाद छात्रा मानसिक रूप से टूट गई और तनाव में आ गई थी।
सुसाइड नोट में दर्दनाक बातें
घटना के करीब दो सप्ताह बाद परिजनों को उसकी किताब से एक हाथ से लिखा सुसाइड नोट मिला, जिसमें उसने अपने माता-पिता के लिए भावनात्मक बातें लिखी थीं। नोट में उसने लिखा कि उसे दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत नहीं है और वह इस दबाव को सहन नहीं कर पा रही है। उसने यह भी लिखा कि उसे डर है कि वह दोबारा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएगी और उसने अपने माता-पिता के सपनों को तोड़ दिया।
पारिवारिक स्थिति और आर्थिक दबाव
मृतका के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी पेशे से किसान हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। बताया गया कि बेटी की पढ़ाई और कोचिंग के लिए परिवार ने 3 लाख रुपये का कर्ज लिया था। पिता नागपुर में काम करके परिवार का खर्च संभाल रहे थे। परिवार पर पहले से ही आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दबाव भी था।
परिजनों के आरोप
परिजनों का आरोप है कि पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने की वजह से उनकी बेटी मानसिक रूप से टूट गई थी। उनका कहना है कि छात्रा पहले परीक्षा में अच्छे अंक आने की उम्मीद से उत्साहित थी, लेकिन अचानक परीक्षा रद्द होने के बाद वह निराशा और तनाव में चली गई।
पुलिस जांच और मामला
पुलिस के अनुसार शुरुआत में इस मामले को आकस्मिक मृत्यु (AD) के रूप में दर्ज किया गया था। बाद में सुसाइड नोट मिलने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को आगे बढ़ाया गया है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
निष्कर्ष
यह घटना देश की परीक्षा प्रणाली और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को उजागर करती है। प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े तनाव और अनिश्चितता के बीच यह मामला गंभीर सामाजिक चिंता का विषय बन गया है।

