WCL कामठी क्षेत्र की कामठी खदान में हुई उस दर्दनाक घटना की, जिसने एक परिवार से उसका सहारा छीन लिया।राधेश्याम गुप्ता, उम्र लगभग 47 वर्ष, कांद्री-कन्हान के निवासी थे। रोज़ की तरह वे अपने ट्रक क्रमांक MH-40-BG-0901 से कोयला भरकर चेकपोस्ट पर एंट्री और पर्ची कटाने के लिए पहुंचे थे।
बताया जा रहा है कि राधेश्याम गुप्ता ने ट्रक को चेकपोस्ट के पास खड़ा किया और खुद पर्ची कटाने के लिए आगे गए। लेकिन जिस जगह पर ट्रक खड़ा किया जाता है , वहाँ की सड़क की हालत बेहद खराब थी। रास्ता कच्चा था, मिट्टी से भरा हुआ था, ढलान थी, सड़क चौड़ी नहीं थी और सबसे महत्वपूर्ण बात—वहाँ सुरक्षा के लिए आवश्यक ब्रेकर भी नहीं थे।ऐसे में ट्रक अचानक ढलान की तरफ लुढ़कने लगा।
जैसे ही राधेश्याम गुप्ता ने अपना ट्रक लुढ़कते देखा, वे उसे रोकने के लिए दौड़े। लेकिन खराब रास्ते और मिट्टी की वजह से उनका पैर फिसल गया। वे संभल नहीं पाए और अपने ही ट्रक की चपेट में आ गए।हादसा इतना भयानक था कि राधेश्याम गुप्ता के शरीर के कई टुकड़े हो गए। मौके पर मौजूद लोगों के लिए भी यह दृश्य देखना बेहद दर्दनाक था।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है—
अगर वहाँ सड़क अच्छी होती…
अगर वहाँ ब्रेकर होता…
अगर रास्ता चौड़ा और सुरक्षित होता…
अगर चेकपोस्ट के आसपास व्यवस्था सही होती…
तो क्या राधेश्याम गुप्ता की जान बच सकती थी?
क्योंकि यह कोई सामान्य सड़क नहीं थी। यह WCL kamptee खदान क्षेत्र का वह हिस्सा है, जहाँ रोज़ाना भारी वाहन आते-जाते हैं। ऐसे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था, पक्के रास्ते, ढलान नियंत्रण, ब्रेकर, संकेत बोर्ड और वाहन रोकने की सुरक्षित व्यवस्था होना बेहद जरूरी है।
लेकिन स्थानीय लोगों और ड्राइवरों के अनुसार, वहाँ इन जरूरी सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है। चेकपोस्ट पर पर्ची कटाने जाने वाले ड्राइवरों को भी ठीक रास्ता नहीं मिलता। जहाँ वाहन खड़े किए जाते हैं, वहाँ भी ढलान और कच्चे रास्ते के कारण खतरा बना रहता है।
और अफसोस की बात यह है कि WCL की यही लापरवाह व्यवस्था, जो अपनी मनमानी में चूर नजर आती है, उसने एक परिवार के मुखिया को हमेशा के लिए छीन लिया। राधेश्याम गुप्ता सिर्फ एक ड्राइवर नहीं थे, वे अपने परिवार के कर्ता-धर्ता थे। उनकी मौत के बाद अब उनका परिवार बेसहारा हो गया है।
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था पर खड़ा एक बड़ा सवाल है।
घटना के बाद भी कई गंभीर बातें सामने आ रही हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हादसे के तुरंत बाद WCL और पुलिस ने आनन-फानन में शव को मौके से हटाने की जल्दी दिखाई। ऐसा कहा जा रहा है कि कहीं लोगों में आक्रोश न बढ़ जाए, कहीं मुआवजे की मांग न उठ जाए, कहीं प्रदर्शन न हो जाए—इस डर से पूरे मामले को जल्दी निपटाने की कोशिश की गई।
सूत्रों का यह भी कहना है कि मौके पर जो लोग घटना के बारे में बोलना चाहते थे, उन्हें चुप रहने के लिए दबाव में लिया गया। पुलिस और पावर का डर दिखाकर आवाज दबाने की कोशिश की गई। अगर यह बात सही है, तो यह बेहद गंभीर विषय है।
क्योंकि किसी की जान गई है।
एक परिवार उजड़ा है।
बच्चों के सिर से पिता का साया उठा है।
ऐसे में सवाल पूछना अपराध नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह भी रही कि इतनी बड़ी और दर्दनाक घटना के बाद भी आसपास मौजूद कुछ कर्मचारी और अधिकारी सामान्य तरीके से चाय-नाश्ते में व्यस्त दिखाई दिए। मानो कुछ हुआ ही नहीं। मानो किसी इंसान की जान की कोई कीमत ही नहीं।
क्या मजदूरों, ड्राइवरों और आम लोगों की जान इतनी सस्ती हो गई है?
क्या खदानों में काम करने वाले लोग सिर्फ सिस्टम के लिए नंबर बनकर रह गए हैं?
क्या WCL को सिर्फ कोयला निकालने और ट्रांसपोर्टेशन से मतलब है, सुरक्षा से नहीं?
आज राधेश्याम गुप्ता नहीं रहे।
लेकिन उनका सवाल जिंदा है।
कौन जिम्मेदार है इस मौत का?
क्या WCL की लापरवाही से एक और परिवार नहीं उजड़ा?
क्या खदान क्षेत्र में सुरक्षा के नियम सिर्फ कागजों पर हैं?
क्या इस हादसे की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा मिलेगा?
और क्या भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए WCL ठोस कदम उठाएगा?
यह सिर्फ राधेश्याम गुप्ता की मौत का मामला नहीं है। यह हर उस ड्राइवर, मजदूर और कामगार की सुरक्षा का सवाल है, जो रोज़ अपनी जान जोखिम में डालकर खदानों में काम करता है।
अब समय है कि लोग अपनी आंखें खोलें।
अब समय है कि इस लापरवाह और भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई जाए।
क्योंकि अगर आज चुप रहे, तो कल किसी और राधेश्याम गुप्ता की जान जा सकती है।
नवीन आवाज़ मीडिया की मांग है—
इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
खदान क्षेत्र में सड़क, ब्रेकर, संकेत बोर्ड और सुरक्षा व्यवस्था तुरंत सुधारी जाए।
और मृतक राधेश्याम गुप्ता के परिवार को उचित मुआवजा और न्याय मिले।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक हादसे का नहीं है…
सवाल है इंसान की जान की कीमत का।

