नागपुर हाईकोर्ट का अहम फैसला
Bombay High Court की नागपुर खंडपीठ ने एक IPS अधिकारी द्वारा दायर तलाक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पत्नी द्वारा अलग रहने के दौरान पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल डिग्री पूरी करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वह मानसिक रूप से अस्थिर नहीं है।
पति ने लगाए थे मानसिक प्रताड़ना के आरोप
IPS अधिकारी ने अदालत में दावा किया था कि उसकी पत्नी का व्यवहार असामान्य था। उसने पत्नी पर आत्महत्या की कोशिश, मारपीट, घरेलू सामान तोड़ने और मानसिक बीमारी से पीड़ित होने जैसे आरोप लगाए। साथ ही पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई IPC 498A की शिकायत को भी मानसिक क्रूरता बताया।
पत्नी ने लगाए दहेज प्रताड़ना के आरोप
पत्नी ने अदालत में पति और उसके परिवार पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने, मारपीट करने और मानसिक रूप से परेशान करने के आरोप लगाए। उसने यह भी कहा कि उसे जानबूझकर मनोरोग अस्पताल में भर्ती कराया गया ताकि उसे मानसिक रूप से बीमार साबित किया जा सके।
फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के पुराने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि पति अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया। अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है जिससे साबित हो कि पत्नी मानसिक बीमारी का इलाज करवा रही थी।
बच्चों से दूरी पर भी कोर्ट ने जताई नाराजगी
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी नोट किया कि वर्ष 2013 से अलग रहने के बावजूद IPS अधिकारी ने बच्चों की कस्टडी लेने या उनकी पढ़ाई से जुड़ी बैठकों में हिस्सा लेने की कोई कोशिश नहीं की।
हर विवाद तलाक का आधार नहीं: हाईकोर्ट
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पति-पत्नी के बीच होने वाले पुराने या अलग-थलग घटनाक्रम को मानसिक क्रूरता का आधार नहीं माना जा सकता। अदालत के अनुसार, तलाक के लिए लगातार और गंभीर मानसिक प्रताड़ना साबित होना जरूरी है, जो इस मामले में साबित नहीं हो सकी।

